चैत्र पूर्णिमा: जानें कब है और पूजा का सही समय
चैत्र पूर्णिमा का महत्व
हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा
चैत्र मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में साल में 12 पूर्णिमा आती हैं, लेकिन चैत्र मास की पूर्णिमा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नववर्ष की पहली पूर्णिमा है और इस दिन भगवान श्रीराम के भक्त हनुमान जी का जन्म भी हुआ था।
चैत्र पूर्णिमा कब मनाई जाएगी?
दृक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा 01 अप्रैल को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 02 अप्रैल को सुबह 7:41 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा 02 अप्रैल को मनाई जाएगी।
पूजा का मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:38 से 05:24 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:20 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:38 से 07:01 बजे तक।
- निशिता मुहूर्त: रात 12:01 से 12:47 बजे तक।
पूजा विधि
चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जल चढ़ाएं। मंदिर की सफाई करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
देसी घी का दीपक जलाकर पूजा करें। पंचामृत, केले और पंजीरी का भोग लगाएं। कथा का पाठ करें और मंत्रों का जाप करें। प्रसाद बांटें और मंदिर या जरूरतमंदों को दान करें।
