ज्येष्ठ अधिक मास का गुरु प्रदोष व्रत 2026: विशेष महत्व और लाभ
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
गुरु प्रदोष व्रत 2026: सनातन धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए कई प्रकार के व्रत और अनुष्ठान किए जाते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण व्रत है प्रदोष व्रत, जिसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय, ज्ञान, संतान सुख और समृद्धि के लिए किया जाता है। जब हिंदू कैलेंडर में त्रयोदशी तिथि गुरुवार को आती है, तब इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। ज्येष्ठ अधिक मास का यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।
आज, 28 मई 2026 को, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत मनाया जा रहा है। इस बार यह व्रत तीन साल बाद आने वाले अधिक मास में पड़ने के कारण और भी विशेष और लाभकारी बन गया है।
ज्ञान और बुद्धि: गुरु ग्रह (बृहस्पति) और भगवान शिव की कृपा से ज्ञान, विवाह और सौभाग्य में वृद्धि होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, बृहस्पति देव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके देवगुरु का पद प्राप्त किया था।
शिव पुराण के अनुसार, गुरु और शिव में कोई भेद नहीं है। स्वयं महादेव ने माता पार्वती को बताया था कि गुरु ही ब्रह्म का रूप हैं।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर या अशुभ फल दे रहा हो, तो भगवान शिव की आराधना सबसे प्रभावी उपाय मानी जाती है।
