Newzfatafatlogo

देवी दुर्गा की पूजा विधि: सही तरीके से करें आराधना

इस लेख में देवी दुर्गा की पूजा विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है। भक्तों को सूर्योदय से पूर्व उठकर कैसे पूजा करनी चाहिए, इसके मंत्र और विधियों का उल्लेख किया गया है। जानें कैसे सही तरीके से देवी दुर्गा की आराधना की जाए और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
 | 
देवी दुर्गा की पूजा विधि: सही तरीके से करें आराधना

देवी दुर्गा पूजन की तैयारी

देवी दुर्गा की पूजा के लिए, भक्तों को सूर्योदय से पहले उठकर पूजा विधि का पालन करना चाहिए। ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, बिस्तर पर बैठकर, दोनों हाथों की हथेलियों को रगड़कर, आंखों और चेहरे पर स्पर्श करते हुए निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें:


मंत्र का महत्व

कराग्रे वसित लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोवन्दः प्रभाते करदर्शनम्।।

इसका अर्थ है कि मनुष्य के हाथों के अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल भाग में ब्रह्मा का वास है। प्रातःकाल इन देवताओं का ध्यान करते हुए हम धन, विद्या और निर्माण कार्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।


पृथ्वी की प्रार्थना

प्राचीन ग्रंथों में ऋषि-मुनियों ने सृष्टि के तत्वों का गहन अध्ययन किया है। पृथ्वी को जीवन का आधार मानते हुए, हमें इसे प्रणाम करना चाहिए। निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करते हुए पृथ्वी की प्रार्थना करें:


मंत्र का उच्चारण

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे।।

इसका अर्थ है कि हे पृथ्वी मां, आप हमारे जीवन का आधार हैं। हम आप पर पांव रखने से पहले क्षमा मांगते हैं।


पूजन की विधि

आराधक को पूजा के दिन व्रत रखना चाहिए और घर के किसी पवित्र स्थान पर मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित करना चाहिए। यदि पुरोहित की व्यवस्था हो, तो वे सभी कार्य संपन्न करेंगे। यदि आप स्वयं पूजा कर रहे हैं, तो विधिपूर्वक सभी कार्य करें।


आराधना का स्थान

यदि आपके घर में कोई पूजा स्थल है, तो वहीं पर दुर्गा पूजन करें। पूजा के समय आराधक को पूर्व की ओर और पुरोहित को उत्तर की ओर मुंह करके बैठना चाहिए।


जल का छिड़काव

पूजा से पहले मां दुर्गा का स्मरण करते हुए, शुद्ध जल से अपने और आसपास छींटे मारें। जल को बाएं हाथ की हथेली पर लेकर दाहिने हाथ से मृगमुद्रा बनाकर जल का छिड़काव करें:


आचमन की प्रक्रिया

ओमः अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपिवा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यान्तरः शुचिः।।

इस मंत्र का उच्चारण करते हुए, हम अपने शरीर और विचारों को पवित्र कर रहे हैं।


दीप प्रज्वलन

दीप जलाना हर शुभ कार्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दीप प्रज्वलित करने से पहले निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें:


पंचदेव पूजा

विभिन्न ग्रंथों में पंचदेव पूजा का विधान वर्णित है। पंचदेवों में सूर्य, गणेश, शिव, विष्णु और दुर्गा की पूजा की जाती है।