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धर्म के मार्गदर्शन में भारत की महानता: मोहन भागवत का संदेश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने छत्रपति संभाजीनगर में एक जनसभा में धर्म के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म ही उन्हें और प्रधानमंत्री मोदी को मार्गदर्शन करता है। भागवत ने बताया कि जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, तब तक देश विश्व गुरु बना रहेगा। उन्होंने जातिगत भेदभाव को समाप्त करने और संघ के उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। जानें उनके विचारों के बारे में और कैसे संघ समाज को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
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धर्म के मार्गदर्शन में भारत की महानता: मोहन भागवत का संदेश

धर्म के महत्व पर मोहन भागवत का विचार


धर्म के मार्गदर्शन से भारत की महानता
मोहन भागवत ने छत्रपति संभाजीनगर में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित जनसभा में कहा कि धर्म ही उन्हें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि धर्म पूरे ब्रह्मांड का संचालन करता है और जब सृष्टि का निर्माण हुआ, तब उसके संचालन के लिए नियम धर्म के रूप में स्थापित हुए। भागवत ने यह भी कहा कि जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, तब तक देश विश्व गुरु बना रहेगा।


धर्म का व्यापक अर्थ

भागवत ने स्पष्ट किया कि सृष्टि के निर्माण के बाद उसके संचालन के लिए जो नियम बने, वे धर्म हैं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता की कमी के कारण ज्ञान का अभाव है। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति की हर चीज का अपना कर्तव्य और अनुशासन होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई व्यक्ति या रचना धर्म के बिना नहीं हो सकती।


संघ का उद्देश्य

जातिगत भेदभाव पर चर्चा करते हुए भागवत ने कहा कि इसे समाप्त करने के लिए मानसिकता में बदलाव लाना होगा। उन्होंने बताया कि आरएसएस का उद्देश्य समाज के साथ मिलकर भारत को उसके सर्वोच्च गौरव तक पहुंचाना है। संघ व्यक्ति के चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में विश्वास रखता है।


संघ की शाखाओं में शामिल होने का आह्वान

भागवत ने कहा कि आरएसएस किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करता और न ही किसी प्रतिक्रिया में बना है। संघ का लक्ष्य समाज को आगे बढ़ाना है। जो लोग संघ को समझना चाहते हैं, उन्हें उसकी शाखाओं में आकर जुड़ना चाहिए।