पंचमुखी हनुमान अवतार की कथा: भक्ति और शक्ति का संगम
पंचमुखी हनुमान अवतार
पंचमुखी हनुमान अवतार: ज्येष्ठ माह को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है। इस महीने में हनुमान जी की आराधना का विशेष विधान है। इस माह के मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है। हनुमान जी के अनेक रूप हैं, जिनमें से एक पंचमुखी हनुमान का अवतार भी है। यह कथा रामायण के युद्ध काल की है, जब रावण ने अपने भाई अहिरावण को मदद के लिए बुलाया। अहिरावण, जो मायावी शक्तियों में माहिर था, ने विभीषण के चेतावनियों के बावजूद राम-लक्ष्मण का अपहरण कर लिया और उन्हें पाताल लोक में ले गया। वहां वह उन्हें अपनी देवी महामाया (निकुंभला) के सामने बलि चढ़ाना चाहता था।
पांच दीपकों को बुझाकर अहिरावण का वध:
अहिरावण ने राम-लक्ष्मण को बंधक बना लिया था और अपनी गुफा में पांच दिशाओं में पांच दीपक जलाए थे। उन दीपकों को एक साथ बुझाने पर ही उसका वध संभव था। हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया, जिसमें वानर, गरुड़, वराह, नृसिंह और हयग्रीव शामिल थे। उन्होंने एक साथ उन पांचों दीपकों को बुझाकर अहिरावण का वध किया।
प्रभु राम और लक्ष्मण को मुक्त करना:
हनुमान जी ने अपने विराट पंचमुखी स्वरूप में उन पांचों दीपकों को एक साथ बुझा दिया। दीपकों के बुझते ही अहिरावण की शक्तियां समाप्त हो गईं और हनुमान जी ने उसे पराजित कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रभु राम और लक्ष्मण को बंधन से मुक्त किया।
तांत्रिक शक्तियों का निष्प्रभावी करना:
पंचमुखी नरसिंह और अन्य उग्र रूपों के माध्यम से हनुमान जी ने राक्षसी तांत्रिक शक्तियों को पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया। यह घटना दर्शाती है कि चाहे कितनी भी बड़ी आसुरी शक्ति क्यों न हो, धर्म और भक्ति के सामने उसे झुकना ही पड़ता है।
