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भौम प्रदोष व्रत: अप्रैल के अंतिम प्रदोष व्रत के लिए विशेष उपाय

भौम प्रदोष व्रत का महत्व हिंदू धर्म में अत्यधिक है। यह व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस बार अप्रैल के अंतिम प्रदोष व्रत पर विशेष उपायों का पालन करने से इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। जानें इस दिन किए जाने वाले उपाय और उनकी धार्मिक मान्यता।
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भौम प्रदोष व्रत: अप्रैल के अंतिम प्रदोष व्रत के लिए विशेष उपाय

भोलेनाथ की कृपा से पूरी होंगी इच्छाएं!


भौम प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष स्थान है। यह दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार अप्रैल के अंतिम प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष के रूप में मनाया जाएगा। यह व्रत मंगलवार को आता है और यह न केवल शिव जी बल्कि हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करने और मंगल दोष से मुक्ति के लिए भी लाभकारी है।


भौम प्रदोष पर विशेष उपाय



  • इस दिन ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। शाम को शिवलिंग पर शहद अर्पित करें और "ॐ ऋणमुक्तेश्वर महादेवाय नम:" का जाप करें।

  • जिनकी कुंडली में मंगल का प्रभाव अधिक है, उन्हें भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। महादेव को लाल मसूर की दाल अर्पित करने से मंगल के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

  • शिवलिंग पर 21 बेलपत्र अर्पित करें। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव मंदिर में दीप जलाने से जीवन के सभी अंधकार दूर होते हैं और अटके हुए कार्य पूरे होते हैं।

  • बीमारियों से मुक्ति के लिए इस दिन शिवलिंग पर दूध में मिश्री और काले तिल मिलाकर अभिषेक करें। महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करना बहुत फलदायी होता है।

  • शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और अपने भक्तों की पुकार जल्दी सुनते हैं।