मां स्कंदमाता की पूजा: नवरात्रि के पांचवे दिन की विशेष विधि और शुभ मुहूर्त
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त की जानकारी
जानें पूजा विधि व शुभ मुहूर्त
Maa Skandmata, नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन, 23 मार्च 2026, मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है। इन्हें भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता के रूप में जाना जाता है। मां का यह स्वरूप ममता और स्नेह का प्रतीक है, जिसमें कार्तिकेय जी बाल रूप में विराजमान हैं, जो दर्शाता है कि मां अपने भक्तों की रक्षा एक संतान की तरह करती हैं।
यदि आपके परिवार में किसी प्रकार की परेशानियां हैं या संतान से जुड़ी चिंताएं हैं, तो मां स्कंदमाता की पूजा से सुख और शांति प्राप्त होती है। यह दिन बड़ी इच्छाओं को पूरा करने और जीवन में सहजता लाने के लिए विशेष है।
मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ समय
चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की आराधना के लिए सुबह का समय अत्यंत कल्याणकारी है। 23 मार्च 2026 को पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 से 12:52 तक रहेगा।
इस शुभ मुहूर्त में की गई प्रार्थना घर में बरकत और खुशहाली लेकर आती है। सही समय पर मां का ध्यान करने से बुद्धि और ज्ञान का विकास होता है और भविष्य की बाधाओं के दूर होने की संभावना बढ़ती है। इस पावन समय में की गई साधना न केवल मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि परिवार में आपसी प्रेम और तालमेल का विस्तार भी करती है।
मां स्कंदमाता की सरल पूजन विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें, जिससे मन में शुद्धता और सहजता का अनुभव हो।
- मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और भगवान का शुक्रिया अदा करें कि उन्होंने आपको जीवन में मां का प्रेम दिया है। मां को पीले रंग के फूल और फल अर्पित करें, क्योंकि उन्हें पीला रंग बहुत प्रिय है।
- भोग के रूप में मां को केले का अर्पण करें, जिससे घर में आरोग्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
- पूजन के दौरान मां के मंत्रों का जाप करें, जो आपके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन का संचालन सुगम बनाता है।
- अंत में मां की आरती करें और श्रद्धा के साथ अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें, जिससे पिता की संपत्ति और मान में वृद्धि हो।
आरती का समय और भक्ति का महत्व
पूजा के समापन पर मां स्कंदमाता की आरती करना अनिवार्य है। सुबह की आरती मुख्य पूजन के बाद और संध्या आरती सूर्यास्त के समय करना सबसे उत्तम रहता है। आरती के समय पूरे परिवार का साथ होना आपसी तालमेल को बढ़ाता है।
आरती के बाद अपनी बड़ी इच्छाएं मां के सामने रखें और उनसे जीवन की कठिनाइयों को दूर करने की प्रार्थना करें। सच्ची भक्ति और श्रद्धा के साथ की गई आरती भविष्य की बाधाओं को दूर करती है और व्यक्ति के भीतर नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। इससे संपत्ति और सामाजिक मान-सम्मान में भी वृद्धि की संभावना प्रबल होती है।
