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राधा अष्टमी पर आरती: राधा रानी की आरती से मिटेंगी सभी परेशानियाँ

राधा अष्टमी का पर्व राधा रानी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त विशेष पूजा करते हैं और राधा रानी की आरती गाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से आरती करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं। जानें राधा रानी की आरती के लिरिक्स और उनके महत्व के बारे में।
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राधा अष्टमी पर आरती: राधा रानी की आरती से मिटेंगी सभी परेशानियाँ

राधा अष्टमी का महत्व

राधा अष्टमी आरती: राधा रानी की आरती करें इस दिन! सभी समस्याएँ दूर होंगी, जानें लिरिक्स: लखनऊ | राधा अष्टमी का पर्व राधा रानी के जन्मदिन के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन वृषभानु जी को धरती पर एक पुत्री मिली, जिसका नाम उन्होंने राधा रखा।


आरती का महत्व

इस विशेष दिन भक्त व्रत रखते हैं और राधा रानी की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से राधा माता की आरती और उपासना करता है, उसके जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। राधा रानी की कृपा पाने के लिए इस दिन उनकी आरती अवश्य करें। आइए जानते हैं राधा रानी की आरती के लिरिक्स।


राधा रानी की आरती: श्री वृषभानुसुता की

आरती श्री वृषभानुसुता की


यह आरती राधा रानी की महिमा का वर्णन करती है। इसमें कहा गया है कि राधा जी त्रिविध तापों को समाप्त करने वाली, पवित्र विवेक और प्रभु के प्रति प्रेम जगाने वाली हैं। उनकी सुंदरता और मधुरता मन को मोह लेती है। यह आरती भक्तों को राधा जी के प्रति प्रेम और भक्ति बढ़ाने में मदद करती है। इसमें राधा जी को कृष्ण की सहचारिणी और जगत की माता बताया गया है, जो दुखों को दूर करती हैं।


आरती के लिरिक्स (अंश):

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि।
मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि।
कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि।


दूसरी आरती: राधारानी तेरी आरती गाऊँ

यह आरती राधा रानी के प्रति भक्ति और समर्पण को दर्शाती है। इसमें राधा जी को बरसाने की महारानी, श्यामा प्यारी और ब्रज की लाडली बताया गया है। भक्त इस आरती को गाकर राधा जी के चरणों में शीश झुकाते हैं और उनके गुणों का गान करते हैं। यह आरती राधा जी के नाम के जप और उनकी भक्ति से जीवन को सुखमय बनाने की प्रेरणा देती है।


आरती के लिरिक्स (अंश):

बरसाने की ऊँची अटारी, छवि श्यामा की लागे अति प्यारी।
लाडली तुम हो ब्रज की महारानी, महिमा तुम्हरी जाये ना बखानी।
राधे राधे गा के तुमको मनाऊँ, राधारानी तेरी आरती गाऊँ।