Newzfatafatlogo

राधा अष्टमी: पूजा विधि और महत्व

राधा अष्टमी का पर्व हर साल धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें देवी राधा और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन की पूजा से जीवन में खुशियाँ और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। जानें इस पर्व की तिथि, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में।
 | 
राधा अष्टमी: पूजा विधि और महत्व

राधा अष्टमी का पर्व

हर वर्ष राधा अष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बरसाना सहित पूरे देश में विशेष उत्सव का माहौल होता है। राधा अष्टमी के अवसर पर देवी राधा और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन राधा और श्रीकृष्ण की पूजा करने से व्यक्ति का जीवन खुशियों से भर जाता है और श्रीजी की कृपा प्राप्त होती है। राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है। इस लेख में हम राधा अष्टमी की तिथि और मुहूर्त के बारे में जानकारी साझा करेंगे...


तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 30 अगस्त की रात 10:46 बजे से शुरू होगी। यह तिथि 31 अगस्त की रात 12:57 बजे समाप्त होगी। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार 31 अगस्त 2025 को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।


पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर एक पूजा स्थल पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर देवी राधा की प्रतिमा को श्रीकृष्ण के साथ स्थापित करें। राधा रानी को सुंदर वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार करें। फिर षोडशोपचार विधि से देवी राधा और श्रीकृष्ण की पूजा करें। पूजा के दौरान राधा रानी के मंत्रों का जाप करें और उनकी कथा का पाठ करें। अंत में आरती करें और केसर वाली खीर का भोग लगाएं।


महत्व

धार्मिक ग्रंथों में राधा अष्टमी का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि बरसाना गांव में वृषभानु जी और कीर्ति जी के घर राधा रानी का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ था। इसे राधा रानी का प्राकट्य दिवस माना जाता है। बृजभूमि में भगवान श्रीकृष्ण के साथ देवी राधा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता है कि राधा नाम का जप करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा सदैव बनी रहती है। राधा अष्टमी के अवसर पर व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जातक के जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं।