स्कंद षष्ठी: पूजा विधि और संतान सुख के उपाय
स्कंद षष्ठी का महत्व
हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष स्थान है। स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान मुरुगन, जिन्हें कार्तिकेय भी कहा जाता है, को समर्पित है। यह व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष, स्कंद षष्ठी 22 अप्रैल को मनाई जाएगी।
स्कंद षष्ठी के धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में भगवान कार्तिकेय को सुब्रमण्यम, मुरुगन और षडानन जैसे नामों से पूजा जाता है। यह मान्यता है कि स्कंद षष्ठी का व्रत उन दंपत्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो संतान सुख की इच्छा रखते हैं। इसके अलावा, यह व्रत शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, आत्मबल बढ़ाने और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में भी सहायक माना जाता है।
स्कंद षष्ठी पूजा विधि 2026
- स्कंद षष्ठी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहनें।
- हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना के साथ व्रत का संकल्प लें।
- एक साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान कार्तिकेय की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- भगवान कार्तिकेय के साथ शिव-पार्वती का पूजन करना भी आवश्यक है।
- पूजन के दौरान भगवान कार्तिकेय को पंचामृत और जल से स्नान कराएं और चंदन, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
- कार्तिकेय जी को नीले फूल और मोरपंख प्रिय हैं, इसलिए इन्हें पूजा में शामिल करें।
- धूप-दीप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- पूजा के दौरान ॐ स्कन्दाय नमः या ॐ शरवणभवाय नमः का जाप करें।
- अंत में कथा सुनें और आरती करें।
स्कंद षष्ठी व्रत के नियम
इस दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना आवश्यक है। तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस और नशीली वस्तुओं का सेवन न करें। व्रत के दिन किसी भी प्रकार के विवाद, क्रोध या निंदा से बचें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जमीन पर सोना शुभ होता है। जरूरतमंदों को फल, वस्त्र और अनाज का दान करें।
संतान सुख के लिए उपाय
यदि आप संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, तो स्कंद षष्ठी का व्रत विशेष महत्व रखता है। इस दिन व्रत-पूजन के साथ कुछ विशेष उपाय करने से संतान सुख की प्राप्ति के योग बनते हैं। शाम के समय घर की दक्षिण दिशा में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
