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हरियाणा में अनाज भंडारण के लिए नए गोदामों का निर्माण

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अनाज भंडारण के लिए 20 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदामों के निर्माण की योजना की घोषणा की है। यह कदम किसानों द्वारा उगाए गए अनाज को सुरक्षित रखने और नुकसान को रोकने के लिए उठाया गया है। बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने अगले 5 वर्षों में इस योजना के तहत होने वाले कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा उत्पादन के लिए गोदामों में सोलर पैनल लगाने का भी सुझाव दिया।
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हरियाणा में अनाज भंडारण के लिए नए गोदामों का निर्माण

मुख्यमंत्री का अनाज भंडारण योजना पर जोर

चंडीगढ़, 2 जून - हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि किसानों द्वारा उगाए गए अनाज को सुरक्षित रखने के लिए राज्य में उचित भंडारण की व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत 20 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदामों का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए अधिकारी लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में तत्पर रहेंगे।


मुख्यमंत्री ने यह निर्देश हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान दिए, जिसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अगले 5 वर्षों के रोडमैप पर चर्चा की गई।


खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आयुक्त जे गणेशन ने बताया कि अनाज का खुले में भंडारण करने से प्रदेश में 4 से 5 प्रतिशत तक नुकसान होता है। इस नुकसान को रोकने के लिए कवर्ड स्टोरेज की व्यवस्था आवश्यक है। वर्तमान में हरियाणा में गेहूं का 115 लाख मीट्रिक टन, चावल का 71 लाख मीट्रिक टन, फल और सब्जियों का 110 लाख मीट्रिक टन तथा दूध और अन्य डेयरी उत्पादों का 115 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होता है। हरियाणा राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा में लगभग 25 प्रतिशत का योगदान देता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्यान्न के नुकसान को रोकने के लिए कवर्ड स्टोरेज और कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई जाए। सभी संबंधित विभागों को मिलकर पीपीपी मोड में 20 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाने का लक्ष्य पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि अगले 5 वर्षों में अनाज, बागवानी फसलों, सब्जियों और फलों के उचित भंडारण के लिए एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।


मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि गोदामों को ऊर्जा उत्पादन के लिए भी उपयोग किया जाए। सभी गोदामों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर इन्हें ग्रिड से जोड़ा जाए ताकि बिजली का उत्पादन बढ़ सके। इसके अलावा, मजदूरों के लिए कन्वेयर बेल्ट जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं का उपयोग करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएं।


खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आयुक्त जे गणेशन ने बताया कि इस योजना के तहत अगले 5 वर्षों में 3000 से 5000 करोड़ रुपये के नुकसान को रोका जा सकेगा।


इस बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।