होलिका दहन: अग्नि की परिक्रमा का महत्व और पूजन सामग्री
होलिका दहन का धार्मिक महत्व
Holika Dahan, नई दिल्ली: 03 मार्च 2026 को मनाए जाने वाले होलिका दहन के पर्व में अग्नि की परिक्रमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। अग्नि को हिंदू धर्म में देवताओं का मुख माना गया है और इसे शुद्धता का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की पवित्र अग्नि की परिक्रमा करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मक ऊर्जा को भस्म करके नए और सकारात्मक जीवन की शुरुआत करने का प्रतीक है।
परिक्रमा का महत्व
मान्यता है कि परिक्रमा करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं कि परिक्रमा क्यों की जाती है और इस पूजा के लिए आपको किन सामग्रियों की आवश्यकता होगी।
सुख और स्वास्थ्य का आशीर्वाद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की अग्नि के चारों ओर तीन या सात बार घूमना सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि सुख और अच्छी सेहत का आशीर्वाद पाने का रास्ता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, परिक्रमा का अर्थ है खुद को ईश्वर की सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ लेना। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, इस बदलते मौसम में अग्नि की गर्मी शरीर की अशुद्धियों को खत्म करने में मददगार साबित होती है।
पूजन सामग्री की सूची
होलिका दहन पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट
- एक लोटा गंगाजल या शुद्ध जल
- रोली, अक्षत (साबुत चावल) और कलावा
- ताजे फूल और माला
- कच्चा सूत (परिक्रमा के लिए)
- साबुत हल्दी की गांठ, मूंग और बताशे
- नारियल (सूखा या पानी वाला)
- नई फसल के अनाज जैसे गेहूं की बालियां या चने के होले
- गोबर के उपले और कपूर
पूजा के दौरान सावधानियां
होलिका दहन की पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आपके लिए मंगलकारी रहेगा। पूजा के समय मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या क्रोध का भाव न लाएं, क्योंकि यह पर्व प्रेम और क्षमा का प्रतीक है। अग्नि की परिक्रमा हमेशा नंगे पैर और शुद्ध मन से करें।
ध्यान रहे कि परिक्रमा के दौरान जल का अर्पण इस तरह करें कि अग्नि पूरी तरह न बुझे, क्योंकि अग्नि का जलते रहना शुभ संकेत माना जाता है। तामसिक भोजन से दूर रहकर संयम के साथ इस त्यौहार को मनाना आपके परिवार में शांति और तालमेल बढ़ाता है। इन सरल नियमों का पालन करने से न केवल आपकी पूजा सफल होती है, बल्कि ईश्वर के प्रति आपकी आस्था और गहरी होती है।
