मंगल ग्रह पर प्राचीन बाढ़ का रहस्य: ईएसए की नई खोज
मंगल ग्रह की प्राचीन बाढ़ का रहस्य
नई दिल्ली: पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों की दुनिया भी कई रहस्यों से भरी हुई है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने हाल ही में मंगल ग्रह के एक प्राचीन रहस्य को उजागर किया है। एजेंसी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई तस्वीरों में बताया कि लगभग 3.5 अरब साल पहले, मंगल की सतह के नीचे छिपा पानी अचानक बाहर आया, जिससे एक भयंकर बाढ़ आई थी।
इस बाढ़ के कारण 10 किलोमीटर चौड़ी और 500 मीटर गहरी एक विशाल घाटी का निर्माण हुआ। यह बाढ़ इतनी प्रचंड थी कि इसने शलबताना वैलिस नामक 1,300 किलोमीटर लंबा चैनल बना दिया, जो इटली के आकार के बराबर है।
ईएसए के मार्स एक्सप्रेस स्पेसक्राफ्ट द्वारा खींची गई नई तस्वीरें इस प्राचीन घटना की एक रोमांचक झलक प्रस्तुत करती हैं। इन तस्वीरों में मंगल की उस सतह को दर्शाया गया है, जिसे पानी, लावा और समय ने आकार दिया है। तस्वीरों में स्पष्ट रूप से कई गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें इम्पैक्ट क्रेटर्स कहा जाता है। इसके अलावा, ज्वालामुखी राख के धब्बे और लावा के ठंडा होने से बनी सिकुड़ी हुई लकीरें भी देखी जा सकती हैं। यह क्षेत्र मंगल के दक्षिणी ऊंचे और उत्तरी निचले इलाकों के बीच स्थित है, जहां क्राइसे प्लैनिटिया भी है, जो मंगल का सबसे निचला क्षेत्र माना जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र में कभी प्राचीन महासागर भी मौजूद था। मार्स एक्सप्रेस 2003 से मंगल की कक्षा में है और इसके बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहा है। इस मिशन में नासा और इतालवी स्पेस एजेंसी भी शामिल हैं।
इसका सबसे महत्वपूर्ण उपकरण एमएआरएसआईएस रडार है, जो मंगल की सतह के नीचे पानी, बर्फ और अन्य भूवैज्ञानिक संरचनाओं का पता लगाने में सक्षम है। यह खोज मंगल ग्रह पर पानी के अतीत को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल कभी गर्म और नम था, जहां नदियां, झीलें और संभवतः महासागर भी थे। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण यह पानी सूख गया या जमीन के नीचे चला गया।
