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2026 में पहली कालाष्टमी: महत्व और पूजा विधि

2026 की पहली कालाष्टमी 10 जनवरी को मनाई जाएगी, जो भगवान कालभैरव को समर्पित है। इस दिन विशेष पूजा विधियों का पालन किया जाता है, जिससे मानसिक स्थिरता और नकारात्मक ऊर्जा में कमी आती है। जानें इस पर्व का धार्मिक महत्व, काले कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा, महामृत्युंजय मंत्र का जप, और अन्य विशेष मान्यताएँ। यह दिन आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच की ओर लौटने का अवसर प्रदान करता है।
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2026 में पहली कालाष्टमी: महत्व और पूजा विधि

कालाष्टमी का महत्व

साल 2026 की पहली कालाष्टमी 10 जनवरी को मनाई जाएगी। यह तिथि माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है, जब भगवान कालभैरव की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि सही विधि से की गई साधना से भय, तनाव, ग्रह बाधा और नकारात्मक ऊर्जा में कमी आती है।


कालाष्टमी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

कालाष्टमी भगवान शिव के उग्र स्वरूप कालभैरव को समर्पित मानी जाती है। शास्त्रों में कालभैरव को समय और न्याय का अधिपति कहा गया है। काशी विश्वनाथ परंपरा में कालभैरव को नगर का कोतवाल माना जाता है।


धर्माचार्यों के अनुसार, हर महीने आने वाली कालाष्टमी में पूजा का अलग महत्व होता है, लेकिन वर्ष की पहली कालाष्टमी को नई शुरुआत और रक्षा कवच के रूप में देखा जाता है।


2026 की पहली कालाष्टमी कब और कैसे

• तिथि: 10 जनवरी 2026
• पक्ष: माघ कृष्ण अष्टमी
• देवता: भगवान कालभैरव


ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दिन पूजा करने से कालसर्प दोष, शनि-राहु प्रभाव और मानसिक अस्थिरता में राहत मिल सकती है। खास बात यह है कि इस दिन की गई साधना का प्रभाव लंबे समय तक रहता है।


काले कुत्ते को भोजन कराना क्यों शुभ है

कालभैरव का वाहन कुत्ता माना गया है, इसलिए कालाष्टमी पर कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा है।


विशेष मान्यता: काले कुत्ते को भोजन देने से भय और बाधा में कमी आती है, पितृ दोष की शांति का संकेत मिलता है, और घर के वातावरण में सकारात्मकता आती है।


अगर काला कुत्ता न मिले, तो किसी भी कुत्ते को स्नेहपूर्वक भोजन कराया जा सकता है।


महामृत्युंजय मंत्र जप का आध्यात्मिक प्रभाव

कालाष्टमी पर महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष फल देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 108 बार जप करने से मानसिक स्थिरता और आत्मबल में वृद्धि होती है।


मंत्र जप के लाभ: रोग और भय में कमी, नकारात्मक विचारों से मुक्ति, ध्यान और ऊर्जा संतुलन।


रुद्राक्ष की माला से जप करने को अधिक प्रभावी माना जाता है।


कालभैरव स्तोत्र या चालीसा पाठ के लाभ

धार्मिक ग्रंथों में कालभैरव स्तोत्र को सुरक्षा कवच के रूप में वर्णित किया गया है। घर या मंदिर में श्रद्धा से पाठ करने से शत्रु बाधा और अनावश्यक विवाद शांत होते हैं।


पाठ के बाद उड़द दाल या मीठा अर्पित करना शुभ माना गया है।


सरसों के तेल का दीपक जलाने का महत्व

कालभैरव को सरसों का तेल प्रिय बताया गया है। शाम के समय दीपक जलाने से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।


मान्यता के अनुसार: ग्रह दोषों का प्रभाव घटता है, भय और अनिश्चितता में कमी आती है, और घर में स्थिरता और शांति बनी रहती है।


दीपक जलाते समय कालभैरव मंत्र का स्मरण किया जाता है।


तिल और उड़द दान का ज्योतिषीय अर्थ

कालाष्टमी पर तिल, उड़द और काले वस्त्र का दान शनि और राहु से जुड़ी समस्याओं में सहायक माना जाता है।


दान के प्रभाव: पुण्य में वृद्धि, कर्म दोष में कमी, आर्थिक और मानसिक संतुलन।


विशेषज्ञों का कहना है कि दान का असर तभी स्थायी होता है जब भावना शुद्ध हो।


इस दिन का महत्व

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मानसिक तनाव और असुरक्षा आम है। कालाष्टमी जैसे पर्व लोगों को आत्मचिंतन, अनुशासन और सकारात्मक सोच की ओर लौटने का अवसर देते हैं। धार्मिक आस्था के साथ यह दिन मनोवैज्ञानिक रूप से भी स्थिरता प्रदान करता है।