अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत: शिव भक्तों के लिए महत्वपूर्ण तिथियाँ
प्रदोष व्रत का महत्व
हिसार, 06 अप्रैल। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अप्रैल 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष रहेगा, क्योंकि इस दौरान वैशाख मास के दो प्रदोष व्रत मनाए जाएंगे। शास्त्रों के अनुसार, त्रयोदशी तिथि पर सूर्यास्त के समय की गई शिव पूजा भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर देती है। इस बार हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मंदिरों में इन विशेष तिथियों पर महादेव के अभिषेक के लिए विशेष तैयारियाँ की जाएंगी।
15 अप्रैल को बुध प्रदोष
अप्रैल का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, बुधवार को होगा। इसे 'बुध प्रदोष' कहा जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष है जो मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं या जिनके वैवाहिक जीवन में समस्याएँ हैं। 15 अप्रैल को प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:47 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा। इस समय शिवलिंग पर शहद और गंगाजल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
बुध प्रदोष का पालन करने से व्यक्ति की निर्णय क्षमता में सुधार होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है। शिव और शक्ति की संयुक्त पूजा से पारिवारिक सामंजस्य बढ़ता है। भक्त इस दिन निराहार रहकर शाम को शिव चालीसा और आरती के साथ व्रत का पारण करते हैं।
28 अप्रैल को भौम प्रदोष
महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को होगा। इसे 'भौम प्रदोष' कहा जाता है। इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भगवान शिव के साथ उनके रुद्रावतार भगवान हनुमान की भी पूजा का विधान है। भौम प्रदोष का व्रत साहस बढ़ाने, कर्ज से मुक्ति पाने और स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए अचूक माना जाता है।
प्रदोष काल वह पवित्र समय होता है जब मान्यता के अनुसार महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में तांडव करते हैं। इस समय दीपदान और बेलपत्र अर्पित करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए भी वैशाख मास के ये व्रत विशेष फलदायी बताए गए हैं।
