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अर्जुन की छाल: हृदय और हड्डियों के लिए अद्भुत औषधि

अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में हृदय रोगों के लिए एक महत्वपूर्ण औषधि माना जाता है। यह न केवल हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करती है, बल्कि हड्डियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार बनाते हैं। जानें इसके उपयोग के तरीके और स्वास्थ्य लाभ।
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अर्जुन की छाल: हृदय और हड्डियों के लिए अद्भुत औषधि

अर्जुन की छाल के लाभ


अर्जुन की छाल के फायदे: आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को हृदय रोगों के लिए एक महत्वपूर्ण औषधि माना जाता है। यह प्राकृतिक उपचार सदियों से मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है, और पाचन, श्वसन, त्वचा तथा हड्डियों के लिए भी लाभकारी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और कसैले गुण होते हैं, जो शरीर को कई प्रकार से लाभ पहुँचाते हैं।


‘हृदय-बल्य’
अर्जुन का पेड़, जिसकी छाल को ‘हृदय-बल्य’ कहा जाता है, हृदय को शक्ति प्रदान करने वाली औषधि मानी जाती है।


हड्डियों के लिए अर्जुन की छाल के लाभ
अर्जुन की छाल केवल हृदय के लिए ही नहीं, बल्कि हड्डियों और घावों के लिए भी फायदेमंद है। इसका लेप हड्डियों के फ्रैक्चर, सूजन या घावों पर लगाने से राहत प्रदान करता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। दस्त, पेचिश और मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं में भी इसका काढ़ा लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा, खांसी, अस्थमा और सांस की तकलीफ जैसी समस्याओं में भी अर्जुन की छाल का काढ़ा या चूर्ण राहत देता है।


उपयोग करने का तरीका
काढ़ा: एक चम्मच छाल पाउडर को दो कप पानी में उबालें, जब तक पानी आधा न रह जाए, फिर छानकर पिएं (सुबह-शाम)।
दूध के साथ: छाल पाउडर को दूध में उबालकर पीने से हृदय रोगों में विशेष लाभ होता है।
चूर्ण: गुनगुने पानी या दूध के साथ सुबह-शाम ½ से 1 चम्मच चूर्ण ले सकते हैं।