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ओडिशा का मां कुरैसुनी मंदिर: साल भर पीठ की पूजा, एक बार मुख के दर्शन

ओडिशा के गंजम जिले में स्थित मां कुरैसुनी मंदिर एक अद्भुत तीर्थ स्थल है, जहां साल भर देवी मां की पीठ की पूजा होती है। भक्त केवल एक बार, आश्विन महीने की दुर्गाष्टमी पर, मां के मुख के दर्शन कर सकते हैं। इस मंदिर की अनूठी परंपरा और सुरम्य प्राकृतिक परिवेश इसे एक विशेष स्थान बनाते हैं। जानें इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में और कैसे यह भक्तों को आकर्षित करता है।
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ओडिशा का मां कुरैसुनी मंदिर: साल भर पीठ की पूजा, एक बार मुख के दर्शन

मां कुरैसुनी मंदिर का अद्भुत रहस्य

नई दिल्ली: भारत में मां भगवती के अनेक मंदिर हैं, जिन्हें शक्तिपीठ और सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता है। लेकिन कुछ रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिर ऐसे भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।


ओडिशा के गंजम जिले के पात्रपुर ब्लॉक में स्थित नुवागाड़ा गांव में मां कुरैसुनी का मंदिर एक प्राचीन और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। यहां देवी मां की पीठ की पूजा साल भर होती है, जबकि उनके मुख के दर्शन केवल आश्विन महीने की दुर्गाष्टमी पर होते हैं। यह मंदिर सुरम्य प्राकृतिक वातावरण में बसा हुआ है। भक्तों का मानना है कि मां के दर्शन से दुखों से मुक्ति मिलती है और मुख के दर्शन से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।


स्थानीय पुजारी दीनबंधु जानी के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 1900 के दशक की शुरुआत में सुरंगी के राजा ने करवाया था। मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली से प्रेरित है, जिसमें रंग-बिरंगे गोपुरम और देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाएं शामिल हैं। मंदिर के चारों ओर का दृश्य मन को शांति प्रदान करता है, क्योंकि यहां हरियाली और जंगल हैं। यह स्थान अध्यात्म और मानसिक शांति के लिए एक अद्भुत स्थल है।


मंदिर के प्रांगण में मां काली की कई प्रतिमाएं हैं, जहां मां अपने रौद्र रूप में भक्तों को दर्शन देती हैं। मंदिर के बाहर एक विशेष पेड़ है, जिसे इच्छा पूर्ति पेड़ कहा जाता है। भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इस पेड़ पर लाल रंग की चुनरी बांधते हैं। स्थानीय लोग इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था रखते हैं, लेकिन अन्य राज्यों से आने वाले भक्त अक्सर इसके दर्शन से वंचित रह जाते हैं।


यह मंदिर पूरे वर्ष, विशेषकर त्योहारों और शुभ अवसरों पर, भक्तों को आकर्षित करता है, जिससे यह एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र बन जाता है। यहां भक्त इस पवित्र स्थल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शांति का अनुभव कर सकते हैं।