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कृषि क्षेत्र में नई किस्मों का विमोचन: किसानों के लिए एक नई शुरुआत

केंद्र सरकार 4 जनवरी 2026 को किसानों के लिए 184 नई फसल किस्मों का विमोचन करने जा रही है। यह पहल जलवायु परिवर्तन और बढ़ती लागत के दबाव के बीच की गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इन किस्मों का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना और संसाधनों का कुशल उपयोग करना है। कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें कृषि विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल होंगे। जानें इस पहल के पीछे का महत्व और किसानों को मिलने वाले लाभ के बारे में।
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कृषि क्षेत्र में नई किस्मों का विमोचन: किसानों के लिए एक नई शुरुआत

कृषि में नई पहल

भारत की कृषि प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए, केंद्र सरकार 4 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इस दिन, देशभर के किसानों के लिए 25 विभिन्न फसलों की 184 नई उन्नत किस्मों का अनावरण किया जाएगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान इस कार्यक्रम का उद्घाटन नई दिल्ली में करेंगे।


महत्वपूर्ण समय पर उठाया गया कदम

यह निर्णय ऐसे समय में लिया जा रहा है जब खेती पर जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून और बढ़ती लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।


नई किस्मों का महत्व

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों ने कई वर्षों के अनुसंधान और फील्ड परीक्षण के बाद इन किस्मों को विकसित किया है। इनका मुख्य उद्देश्य न केवल उत्पादन में वृद्धि करना है, बल्कि कम पानी, खाद और कीटनाशकों का उपयोग करते हुए बेहतर पैदावार सुनिश्चित करना भी है।


कार्यक्रम का आयोजन

यह कार्यक्रम नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स के ए पी शिंदे ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा, जिसमें लगभग 250 कृषि विशेषज्ञ, नीति निर्माता और वैज्ञानिक भाग लेंगे।


अनाज फसलों पर ध्यान

जारी होने वाली 184 किस्मों में से 122 अनाज वर्ग की हैं, जो सरकार की खाद्य सुरक्षा नीति को दर्शाती हैं। इसमें धान की 60 नई किस्में और मक्का की 50 किस्में शामिल हैं।


दालों और तिलहनों को भी बढ़ावा

देश में दाल और तेल की बढ़ती मांग को देखते हुए इन फसलों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। दालों में 6 नई किस्में और तिलहनों में 13 नई किस्में शामिल हैं।


कपास, गन्ना और चारा फसलें

पशुपालन और नकदी फसलों से जुड़े किसानों के लिए कपास, गन्ना और चारा फसलों की नई किस्में भी जारी की जाएंगी।


किसानों को लाभ

इन नई किस्मों से किसानों को कई स्तर पर लाभ मिलने की संभावना है, जैसे कि अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता, रोग और कीटों के प्रति सहनशीलता, और खेती की लागत में कमी।


भविष्य की दिशा

कार्यक्रम के बाद, इन किस्मों के बीजों को चरणबद्ध तरीके से राज्यों में वितरित किया जाएगा। कृषि विभाग और बीज एजेंसियों के माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी भी प्रदान की जाएगी।


महत्वपूर्ण कदम

भारत की आधी से अधिक जनसंख्या खेती पर निर्भर है। वैज्ञानिक नवाचार ही खेती को लाभकारी बना सकते हैं, और यह पहल भविष्य की खेती की नींव रखने का कार्य करेगी।