कृषि विकास के लिए क्षेत्रीय रणनीतियों पर जोर: केंद्रीय मंत्री चौहान
कृषि सम्मेलन में नई दिशा की घोषणा
लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कृषि विकास अब क्षेत्रीय आवश्यकताओं और जलवायु के अनुसार रणनीतियों पर आधारित होगा। इसमें किसान की आय, खाद्य सुरक्षा और विविधीकरण को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए एकरूप नीति के बजाय क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजना बनाई जा रही है। इस सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में चौहान ने बताया कि विभिन्न राज्यों की जलवायु, जल उपलब्धता और फसल पैटर्न के अनुसार कृषि रणनीतियों को तैयार किया जाएगा।
इस उद्देश्य के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। चौहान ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि के बावजूद दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना आवश्यक है। उन्होंने कृषि नीति के तीन मुख्य लक्ष्यों—खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और पोषण—का उल्लेख किया।
सरकार की प्राथमिकताओं में उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना, किसानों को उचित मूल्य दिलाना, नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना और कृषि को बाजार से जोड़ना शामिल है। इसके साथ ही कृषि विविधीकरण पर जोर दिया जा रहा है, ताकि पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिल सके। छोटे और सीमांत किसानों के लिए एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें फसल के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे विकल्प शामिल हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत सस्ती दर पर ऋण पहुंचाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। 'फार्मर आईडी' को पारदर्शी और लक्षित कृषि लाभ वितरण के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया। 'प्रयोगशाला से खेत तक' की अवधारणा के तहत वैज्ञानिकों को गांवों में जाकर किसानों से संवाद करने और नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उर्वरकों की कीमतों पर चौहान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा और केंद्र सरकार इसके लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि इस संबंध में कड़े कानून लाने की तैयारी की जा रही है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उत्तर भारत में कृषि प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समन्वित रणनीति पर कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य मिल सके। इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव आगामी खरीफ और रबी सत्र की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
