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केदारनाथ धाम: भैंसे की पीठ को शिव का रूप मानने की रोचक कथा

केदारनाथ धाम, भगवान शिव का एक प्रमुख तीर्थ स्थल, अपनी अद्भुत पौराणिक कथा के लिए प्रसिद्ध है। यहां भैंसे की पीठ को शिव का रूप मानकर पूजा की जाती है। यह कहानी पांडवों की भक्ति और भगवान शिव के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती है। जानें कैसे पांडवों ने भगवान शिव की कृपा प्राप्त की और केदारनाथ की धार्मिक महत्ता को समझें।
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केदारनाथ धाम: भैंसे की पीठ को शिव का रूप मानने की रोचक कथा

केदारनाथ धाम का महत्व


उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम भगवान शिव का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह चार धामों में से एक है और इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से 11वां माना जाता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए आते हैं।


केदारनाथ की पौराणिक कथा

कहा जाता है कि पांडवों ने केदारनाथ में भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का निर्माण कराया था। महाभारत के युद्ध के बाद, पांडव अपने पापों से मुक्ति के लिए भगवान शिव की आराधना करने निकले।


हालांकि, भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न नहीं थे और केदारनाथ चले गए। पांडव भी उनके दर्शन के लिए वहां पहुंचे। भगवान शिव ने भैंसे का रूप धारण कर लिया ताकि पांडव उन्हें पहचान न सकें।


भैंसे की पीठ का महत्व

भीमसेन ने भगवान शिव को खोजते हुए अपने शरीर को विशाल बना लिया और अपने पैरों को दो पहाड़ों पर फैला दिया। सभी पशु वहां से निकल गए, लेकिन एक भैंसा वहीं रह गया।


भीम ने उस भैंसे की पीठ को पकड़ लिया, जिससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर पांडवों को उनके पापों से मुक्त किया। तभी से केदारनाथ में भैंसे की पीठ को शिव का रूप मानकर पूजा जाने लगा।