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केदारनाथ शिवलिंग का त्रिकोण आकार: जानें इसकी अद्भुत कहानी

केदारनाथ धाम में स्थित शिवलिंग का त्रिकोण आकार इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग बनाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे पांडवों ने भगवान शिव की शरण ली और इस अद्भुत शिवलिंग का आकार कैसे बना। इसके पीछे की पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व को समझें।
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केदारनाथ शिवलिंग का त्रिकोण आकार: जानें इसकी अद्भुत कहानी

भगवान महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ धाम


उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर स्थित केदारनाथ धाम भगवान महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह धाम हिमालय की ऊंचाइयों में बसा हुआ है, जहां हर साल लाखों शिव भक्त दर्शन के लिए आते हैं। केदारनाथ को भगवान शिव का दिव्य निवास भी माना जाता है और यह पंचकेदार में शामिल है, जो भक्तों की आस्था का केंद्र है।


यहां स्थापित शिवलिंग का आकार अन्य ज्योतिर्लिंगों से भिन्न है। यह गोल नहीं, बल्कि त्रिकोणीय है। आइए जानते हैं इसके पीछे की प्राचीन और दिलचस्प कथा।


पौराणिक कथा का रहस्य

केदारनाथ में स्थित शिवलिंग का आकार त्रिकोण है, जिसकी ऊंचाई और चौड़ाई लगभग 12 फीट है। यह शिवलिंग बैल की पीठ के आकार का प्रतीत होता है और इसका संबंध पांडवों और भगवान शिव से जुड़ा हुआ है।


कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों को अपने कृत्यों पर पछतावा हुआ। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान शिव की शरण ली।


पांडवों की परीक्षा

भगवान शिव ने पांडवों की परीक्षा लेने का निर्णय लिया और बैल का रूप धारण कर धरती पर छिप गए। भीम ने बैल की पूंछ पकड़ ली, जिससे केवल बैल की पीठ ही भूमि पर रह गई।


यही बैल का कूबड़ केदारनाथ धाम में है, जिसके कारण यहां का शिवलिंग त्रिभुजाकार है। भगवान शिव बैल के रूप में अंतर्ध्यान हो गए और उनके अन्य अंगों का प्रकट होना पंचकेदार के पांच स्थानों पर हुआ।


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