खरमास: जानें कब से शुरू हो रहा है यह अशुभ महीना
खरमास का महत्व और प्रभाव
शादियों और मांगलिक कार्यों पर रोक
खरमास का समय सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे एक अशुभ अवधि माना जाता है, जिसके चलते इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। खरमास साल में दो बार आता है, जब सूर्य देव धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इस बार मार्च में खरमास की शुरुआत को लेकर लोगों में संदेह है कि यह 14 या 15 मार्च से शुरू होगा। आइए, इस विषय पर विस्तार से जानते हैं और यह भी समझते हैं कि खरमास में शुभ कार्यों की मनाही क्यों है।
खरमास की शुरुआत की तिथि
ज्योतिष के अनुसार, सूर्य देव 15 मार्च को कुंभ राशि से बाहर निकलेंगे और उसी दिन 01:08 बजे मीन राशि में प्रवेश करेंगे। मीन राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ ही खरमास की शुरुआत होगी। इस दिन मीन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। खरमास 14 अप्रैल को समाप्त होगा, जिसके बाद सभी शुभ कार्य फिर से शुरू हो सकेंगे।
खरमास में शुभ कार्यों की मनाही
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उनकी ऊर्जा में कमी आ जाती है। इससे उनकी शुभता भी प्रभावित होती है। धनु और मीन राशि का स्वामित्व गुरु बृहस्पति के पास है, और जब सूर्य इन राशियों में होते हैं, तो गुरु का प्रभाव भी कम हो जाता है। इसलिए, खरमास के दौरान शुभ कार्यों को रोक दिया जाता है।
