गुरु पर्वत का महत्व: हस्तरेखा शास्त्र में जानें
किस्मत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
गुरु पर्वत का महत्व
नई दिल्ली: हस्तरेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं के साथ-साथ पर्वतों का भी विशेष महत्व होता है। इनमें से एक महत्वपूर्ण पर्वत गुरु पर्वत है, जो ज्ञान, सम्मान, पद और भाग्य से जुड़ा होता है। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति का गुरु पर्वत मजबूत है, तो उसे समाज में प्रतिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और सफलता प्राप्त होती है। आइए जानते हैं गुरु पर्वत का स्थान, महत्व और इससे जुड़ी विशेष बातें।
गुरु पर्वत का स्थान
हाथ की तर्जनी उंगली (पहली उंगली) के नीचे जो उभरा हुआ भाग होता है, उसे गुरु पर्वत कहा जाता है। यह स्थान ज्योतिष के गुरु ग्रह यानी बृहस्पति का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, नैतिकता और समृद्धि का कारक ग्रह माना गया है, इसलिए गुरु पर्वत भी इन्हीं गुणों का प्रतिनिधित्व करता है।
गुरु पर्वत मजबूत होने के संकेत
यदि किसी व्यक्ति का गुरु पर्वत उभरा हुआ, साफ और बिना कटे-फटे निशानों के हो, तो यह बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता, धर्म और आध्यात्म में रुचि, समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा, उच्च पद प्राप्त करने की संभावना, न्यायप्रिय और सिद्धांतवादी स्वभाव होते हैं। ऐसे लोग अक्सर प्रशासन, शिक्षा, राजनीति या धार्मिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते हैं।
कमजोर गुरु पर्वत के संकेत
यदि गुरु पर्वत दबा हुआ, कटा-फटा या उस पर जाल जैसा निशान हो, तो इसे शुभ नहीं माना जाता। इसके संकेत हो सकते हैं आत्मविश्वास की कमी, निर्णय लेने में असमर्थता, मान-सम्मान में कमी, गलत संगति का प्रभाव, और गुरुजनों से मतभेद।
गुरु पर्वत को मजबूत करने के उपाय
- गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनें।
- पीली दाल या हल्दी का दान करें।
- गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करें।
- केले के पेड़ की पूजा करें।
- जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता करें।
- इन उपायों से गुरु ग्रह का प्रभाव सकारात्मक होता है।
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