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थाई भिक्षुओं की शांति यात्रा: रामग्राम से देवदह तक का सफर

थाईलैंड के 120 भिक्षुओं का एक दल, जो शांति और मानवता का संदेश फैलाने के लिए यात्रा कर रहा है, रामग्राम से देवदह तक पहुंचा। इस यात्रा में भिक्षुओं ने पूजा-अर्चना की और स्थानीय समिति द्वारा उनका स्वागत किया गया। जानें इस यात्रा के महत्व और भिक्षुओं के अनुभव के बारे में।
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थाई भिक्षुओं की शांति यात्रा: रामग्राम से देवदह तक का सफर

शांति का संदेश फैलाने की यात्रा


दुनिया में शांति और मानवता का संदेश फैलाने के लिए थाईलैंड के 120 भिक्षुओं का एक दल, जो पूज्य भिक्षु फ्रा प्रानाट के नेतृत्व में है, दिसंबर में कोलकाता से अपनी पदयात्रा शुरू कर बोधगया और कुशीनगर होते हुए आगे बढ़ा।


इस यात्रा के दौरान, भिक्षुओं का समूह 27 फरवरी 2026 को महराजगंज के धर्मौली, परतावल में रात्रि विश्राम के बाद 28 फरवरी को जनपद मुख्यालय से होते हुए रामग्राम चौक बाजार पहुंचा, जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया।


फिर, 1 मार्च 2026 की सुबह 4:30 बजे, भिक्षुओं ने रामग्राम में पूजा की और भगवान गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह (बनरसिया) के लिए प्रस्थान किया। यात्रा के दौरान, वे माता महामाया बुद्ध विहार, टेढ़ी में प्रातः 5:20 बजे पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की।


देवदह पहुंचने पर, देवदह–रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों ने भिक्षु दल का स्वागत किया। समिति ने सभी भिक्षुओं को चाय-नाश्ता कराया और उन्हें देवदह स्थित प्राचीन स्तूप पर पूजा करने का अवसर दिया। इस दौरान, पदाधिकारियों ने देवदह-रामग्राम के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के बारे में जानकारी दी।


कार्यक्रम के अंत में, समिति की ओर से भिक्षु दल के नेता फ्रा प्रानाट को देवदह–रामग्राम का चित्र भेंट किया गया और सभी भिक्षुओं को उनके अगले गंतव्य, भगवान बुद्ध के जन्मस्थल लुंबिनी (नेपाल) के लिए विदाई दी गई।


कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित:


अध्यक्ष जितेंद्र राव, उपाध्यक्ष महेंद्र जयसवाल, महामंत्री लक्ष्मी चन्द्र पटेल, संरक्षक शिवभुजा पाण्डेय, ब्लॉक अध्यक्ष रोहित गौतम, प्रहलाद गौतम, डॉ. महावीर भारती, संतराम प्रसाद बौद्ध, आकाश राव, रामलगन गौतम, डॉ. गौरी शंकर, बबलू तिवारी, मंगल प्रसाद, संरक्षक रमेश पटेल, प्रधान अमित सिंह, प्रधान राम बेलाश, अमरनाथ चौधरी, सुग्रीव कुमार बौद्ध सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


थाई भिक्षुओं की शांति यात्रा: रामग्राम से देवदह तक का सफर