पंजाब में बेअदबी के खिलाफ नया कानून लागू, उम्रकैद की सजा का प्रावधान
पंजाब में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून
चंडीगढ़ : पंजाब में धार्मिक बेअदबी के मामलों को रोकने के लिए एक नया कानून लागू किया गया है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस कानून से संबंधित बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे यह कानून जल्द ही पूरे राज्य में प्रभावी होगा।
इस बिल को मंजूरी मिलने के बाद, इसे कानूनी रूप दे दिया गया है। यह उम्मीद की जा रही है कि इस कानून के लागू होने से बेअदबी के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसे अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀ ਬੇਅਦਬੀ ਵਿਰੁੱਧ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਵਿੱਚ ਪਾਸ ਕੀਤੇ ਗਏ ਬਿੱਲ ਉੱਤੇ ਮਾਣਯੋਗ ਰਾਜਪਾਲ ਸ੍ਰੀ ਗੁਲਾਬ ਚੰਦ ਕਟਾਰੀਆ ਜੀ ਨੇ ਦਸਤਖ਼ਤ ਕਰ ਦਿੱਤੇ ਹਨ..ਹੁਣ ਇਹ ਬਿੱਲ ਕਾਨੂੰਨ ਬਣ ਗਿਆ ਹੈ..ਮੇਰੇ ਵਰਗੇ ਨਿਮਾਣੇ ਤੋਂ ਇਹ ਸੇਵਾ ਲੈਣ ਲਈ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਦਾ ਕੋਟਿਨ- ਕੋਟ ਧੰਨਵਾਦ..ਸਮੂਹ ਸੰਗਤ ਦਾ ਸ਼ੁਕਰਾਨਾ.. pic.twitter.com/IaR9IYh4ol
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) April 19, 2026
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस जानकारी को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। उन्होंने लिखा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के खिलाफ विधानसभा में पारित किए गए बिल पर राज्यपाल ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब यह कानून बन चुका है।
नए कानून के तहत बेअदबी के लिए ये कार्य अपराध माने जाएंगे:
1. जानबूझकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप को फाड़ना, जलाना या नष्ट करना।
2. पवित्र ग्रंथ पर थूकना या उसे गंदे हाथों से छूना।
3. गुरु साहिब के स्वरूप को सार्वजनिक रूप से फेंकना या गलियों में छोड़ देना।
4. पवित्र स्वरूप को चोरी करना या उसे अनुचित तरीके से रखना।
5. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की उपस्थिति में शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करना।
6. सोशल मीडिया पर गुरु साहिब के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ करना।
पंजाब विधानसभा ने बैसाखी के अवसर पर 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित किया था। इस कानून के तहत बेअदबी के दोषियों को आजीवन कारावास और 5 लाख से 25 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह अपराध अब गैर-जमानती और संज्ञेय श्रेणी में आ गया है।
हालांकि, यह विधेयक केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी पर लागू होगा। अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों के खिलाफ इस कानून के तहत फिलहाल कोई सजा का प्रावधान नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य धर्मों के लोगों से भी राय लेकर जल्द ही कानून बनाया जाएगा।
