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भारत में पहली बार खोजे गए दो दुर्लभ सांप, वैज्ञानिकों को मिली नई जानकारी

भारत में पहली बार दो दुर्लभ सांपों की प्रजातियों की खोज की गई है, जो पहले केवल म्यांमार में देखी जाती थीं। वैज्ञानिकों ने इन सांपों को मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के जंगलों में खोजा है। इनकी खुरदरी त्वचा और अद्वितीय रंग-रूप इन्हें छिपने में मदद करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में और भी कई अज्ञात जीव-जंतु हो सकते हैं। जानें इस खोज के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता के बारे में।
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भारत में पहली बार खोजे गए दो दुर्लभ सांप, वैज्ञानिकों को मिली नई जानकारी

नई खोज से बढ़ी जैव विविधता की कहानी

नई दिल्ली: भारत की जैव विविधता में एक नया और रोमांचक अध्याय जुड़ गया है। देश में पहली बार दो दुर्लभ सांपों की प्रजातियों की खोज की गई है, जिन्हें पहले कभी भारतीय सीमा के भीतर नहीं देखा गया था। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के वैज्ञानिकों ने पूर्वोत्तर भारत के जंगलों में 'कीलबैक' प्रजाति के इन रहस्यमयी सांपों को खोज निकाला है। यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन सांपों को पहले केवल म्यांमार में ही देखा गया था, लेकिन अब इनकी उपस्थिति ने भारतीय वैज्ञानिकों की जिज्ञासा को और बढ़ा दिया है।


मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में मिली दुर्लभ प्रजातियाँ

वैज्ञानिकों के अनुसार, इन सांपों की खोज मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के कठिन इलाकों में की गई है। इनमें से एक 'रखाइन कीलबैक' प्रजाति का सांप मिजोरम के न्गेंगपुई वन्यजीव अभयारण्य में पाया गया, जबकि दूसरा 'कचिन हिल्स कीलबैक' अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध नमदाफा नेशनल पार्क में देखा गया। इन सांपों की एक खास बात यह है कि ये जहरीले नहीं होते और मुख्य रूप से पानी के आसपास या दलदली क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं।


खुरदरी त्वचा और अद्वितीय रंग-रूप

कीलबैक प्रजाति के इन सांपों का आकार और रंग-रूप अन्य सांपों से काफी भिन्न और दिलचस्प है। हल्के लाल रंग की इन सांपों की त्वचा चिकनी नहीं, बल्कि खुरदरी और परतनुमा होती है। इनकी पीठ पर एक उभरी हुई लकीर होती है, जिसके कारण इन्हें कीलबैक कहा जाता है। इनकी यही खुरदरी और चमकदार त्वचा उन्हें कीचड़ या वेटलैंड में छिपने में मदद करती है। इनकी त्वचा रोशनी को इस तरह से परावर्तित करती है कि ये अपने आसपास के माहौल में घुल-मिल जाते हैं और किसी की नजर इन पर नहीं पड़ती।


पूर्वोत्तर भारत में और भी रहस्यमय जीवों की संभावना

भारत में कुल 300 से अधिक सांपों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से केवल 60 जहरीले हैं। नमदाफा नेशनल पार्क जैसी ऊंचाई और घने जंगलों में इन नई प्रजातियों की खोज के बाद वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां और भी कई जीव-जंतु हो सकते हैं, जिनका उल्लेख अब तक किसी दस्तावेज में नहीं किया गया है। वैज्ञानिकों ने सरकार से अपील की है कि पूर्वोत्तर भारत के इन दुर्गम क्षेत्रों में व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किए जाएं, ताकि और भी अज्ञात और लुप्तप्राय प्रजातियों को खोजा जा सके और उनका संरक्षण किया जा सके।