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मंगल की महादशा: लक्षण और उपाय जानें

मंगल की महादशा एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय अवधारणा है, जो व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। यह अवधि सात वर्षों तक चलती है और इसके लक्षण शुभ और अशुभ दोनों हो सकते हैं। यदि मंगल शुभ स्थिति में है, तो यह साहस और ऊर्जा में वृद्धि करता है, जबकि अशुभ स्थिति में संघर्ष और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। इस लेख में हम मंगल की महादशा के लक्षण और इसके उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
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मंगल की महादशा: लक्षण और उपाय जानें

मंगल की महादशा के बारे में जानें


मंगल की महादशा के उपाय जानें
ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों का उल्लेख किया गया है, जिनमें से प्रत्येक का जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। हर व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी ग्रह की महादशा और अंतर्दशा आती है, जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव डालती है।


यदि कुंडली में कोई ग्रह शुभ स्थिति में है, तो महादशा का फल सकारात्मक होता है। इसके विपरीत, अशुभ स्थिति में व्यक्ति को संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं मंगल की महादशा के लक्षण और उपाय।


मंगल की महादशा की अवधि

वैदिक ज्योतिष में मंगल की महादशा को एक महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है, जो सात वर्षों तक चलती है। इस दौरान मंगल का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली में उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। यदि मंगल शुभ है, तो यह साहस, ऊर्जा और महत्वाकांक्षा को बढ़ा सकता है। लेकिन यदि यह अशुभ है, तो यह दुर्घटनाओं और झगड़ों का कारण बन सकता है।


मंगल की महादशा के लक्षण

मंगल की महादशा के लक्षण भी शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के होते हैं। यदि कुंडली में मंगल शुभ है, तो व्यक्ति की साहस, दृढ़ निश्चय और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है। करियर में सफलता और संपत्ति की प्राप्ति होती है। वहीं, अशुभ मंगल के कारण संघर्ष, आक्रामकता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।


मंगल की महादशा के उपाय

मंगल की महादशा के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करना लाभकारी होता है। इस दिन लाल कपड़े, मसूर दाल, गुड़ और तांबा दान करें। इसके अलावा, "ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:" मंत्र का जप करें और हर मंगलवार को व्रत रखें। रक्तदान भी एक अच्छा उपाय है।