मार्च में पापमोचनी एकादशी: तिथि, पूजा विधि और महत्व
पापमोचनी एकादशी, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, मार्च 2026 में मनाई जाएगी। इस व्रत का महत्व और पूजा विधि जानें। यह व्रत पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। जानें इसकी तिथि और शुभ मुहूर्त।
| Mar 6, 2026, 15:32 IST
पापमोचनी एकादशी का महत्व और पूजा विधि
जानें डेट शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
पापमोचनी एकादशी, नई दिल्ली: सनातन धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। हर महीने में दो एकादशी होती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। मार्च का महीना चल रहा है, जबकि हिंदी पंचांग के अनुसार, चैत्र का महीना आरंभ हो चुका है। चैत्र माह में पापमोचनी और कामदा एकादशी का व्रत रखा जाता है।
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन पापमोचनी एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं कि मार्च में पापमोचनी एकादशी कब मनाई जाएगी, इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व क्या है।
पापमोचनी एकादशी व्रत 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च 2026 को सुबह 08:10 बजे शुरू होगी और 15 मार्च 2026 को सुबह 09:16 बजे समाप्त होगी। इस प्रकार, उदया तिथि के अनुसार, 15 मार्च को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 16 मार्च 2026 को सुबह 06:30 से 08:54 बजे के बीच किया जा सकेगा।पापमोचनी एकादशी पूजा विधि
- पापमोचनी एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- इसके बाद सूर्य देवता को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर में चौकी बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
- पूजा के दौरान गंगाजल, फूल-फल, रोली-चंदन, हल्दी, धूप-दीप, मिष्ठान आदि अर्पित करें।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में भगवान विष्णु की आरती करके पूजा का समापन करें।
