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मौनी अमावस्या: पितरों की शांति और आत्मिक शुद्धि का दिन

18 जनवरी को मौनी अमावस्या का पर्व मनाया जा रहा है, जो पितरों की शांति और आत्मिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन मौन रहकर दान और स्नान करने की परंपरा है। जानें इस दिन के विशेष महत्व, पूजा विधि और पितृ दोष निवारण के उपाय।
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मौनी अमावस्या: पितरों की शांति और आत्मिक शुद्धि का दिन

मौनी अमावस्या का महत्व

आज, 18 जनवरी को, मौनी अमावस्या का पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन पितरों की शांति और आत्मिक शुद्धि के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस दिन मौन रहकर दान और स्नान करने की परंपरा है।


माघ महीने की अमावस्या

आज का दिन माघ महीने की अमावस्या है, जिसे हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस बार यह तिथि रविवार को पड़ने के कारण और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।


आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

मौनी अमावस्या का नाम 'मुनि' से आया है, जिसका अर्थ है मौन धारण करना। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इस दिन मौन रहकर अपनी ऊर्जा को संरक्षित करना चाहिए।


इस दिन वाणी पर नियंत्रण रखने से मानसिक तनाव कम होता है और आंतरिक शक्ति जागृत होती है। यदि चुप रहना संभव न हो, तो कम से कम नकारात्मक शब्दों से बचें और ईश्वर के ध्यान में समय बिताएं।


रविवार और अमावस्या का संयोग

ज्योतिष के अनुसार, रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है, जबकि अमावस्या पितरों की तिथि है। इस दिन सूर्य देव की उपासना और पितरों का तर्पण करने से कुंडली में मौजूद पितृ दोष और सूर्य दोष दोनों का निवारण हो सकता है।


ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का महत्व

आज गंगा स्नान का महत्व अश्वमेध यज्ञ के बराबर माना गया है। यदि आप किसी पवित्र नदी पर नहीं जा सकते, तो घर पर स्नान के पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाएं। स्नान करते समय 'हर हर गंगे' का जाप करें।


मान्यता है कि इस दिन देवता अदृश्य रूप से संगम में स्नान करने आते हैं, जिससे पुराने पापों का नाश होता है।


पितृ दोष निवारण के उपाय

यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष है, तो आज दोपहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पूर्वजों को जल अर्पित करें। लोटे में जल, काले तिल, गुड़ और सफेद फूल डालकर तर्पण करें।


साथ ही 'ओम पितृभ्यो नमः' मंत्र का जाप करें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।


दान का महत्व

मौनी अमावस्या पर दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। सर्दी के मौसम में गर्म कपड़े, कंबल, ऊन या जूते चप्पल का दान करना उत्तम है। इसके अलावा काले तिल, गुड़, घी, अनाज और गौ सेवा के लिए धन का दान करें।


विशेष सावधानियां

आज रविवार होने के कारण कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।


  • तुलसी पूजन: आज तुलसी के पौधे को जल न चढ़ाएं और न ही स्पर्श करें।
  • पीपल पूजा: रविवार को पीपल की पूजा नहीं करनी चाहिए।
  • सात्विक भोजन: आज के दिन पूरी तरह सात्विक रहें।
  • क्रोध पर काबू: मौन व्रत का पालन करें और घर में किसी भी विवाद से बचें।


भगवान विष्णु और शिव की आराधना

आज भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा फलदायी है। आप भगवान विष्णु के मंत्र 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप कर सकते हैं। शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल चढ़ाना भी शुभ रहेगा।