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योग से वृद्धावस्था में स्वास्थ्य बनाए रखने के उपाय

बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य समस्याएं आम हो जाती हैं, लेकिन नियमित योगाभ्यास, विशेषकर सर्वांगासन, इनसे निपटने में मदद कर सकता है। आयुष मंत्रालय ने वृद्धावस्था में स्वस्थ जीवन के लिए योग को अपनाने की सलाह दी है। यह आसन न केवल पाचन संबंधी समस्याओं को कम करता है, बल्कि थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय कर हार्मोन संतुलन बनाए रखता है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ बुढ़ापा केवल शारीरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आंतरिक संतुलन बनाए रखने से भी जुड़ा है। जानें कैसे योग आपके जीवन को बेहतर बना सकता है।
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योग से वृद्धावस्था में स्वास्थ्य बनाए रखने के उपाय

स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग का महत्व

नई दिल्ली: उम्र बढ़ने के साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, लेकिन नियमित योगाभ्यास से इनसे काफी हद तक निपटा जा सकता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वृद्धावस्था में स्वस्थ जीवन के लिए सर्वांगासन, जिसे शोल्डर स्टैंड भी कहा जाता है, को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है।


विश्व योग दिवस 2026 के अवसर पर स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग को अपनाने की थीम रखी गई है। मंत्रालय का उद्देश्य यह बताना है कि योग केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों, विशेषकर बुजुर्गों के लिए भी फायदेमंद है। सर्वांगासन जैसी क्रियाओं को अपनाकर वृद्धावस्था में भी स्वास्थ्य को बनाए रखा जा सकता है।


यह आसन पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने और शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को संतुलित रखने में मदद करता है। सर्वांगासन को योग की महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक माना जाता है, जिसमें शरीर को कंधों के बल उल्टा किया जाता है। यह आसन थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करता है, जिससे हार्मोन का संतुलन बना रहता है। इसके अलावा, यह पेट की समस्याओं जैसे कब्ज, अपच और गैस को दूर करने में भी सहायक होता है।


यह रक्त संचार को सुधारने और मस्तिष्क को ऑक्सीजन पहुंचाने का भी एक प्रभावी तरीका है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ बुढ़ापा केवल शारीरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के अंदरूनी संतुलन को बनाए रखने से भी जुड़ा है। यदि हम आज छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाते हैं, तो आने वाले वर्षों में स्वस्थ और सक्रिय वृद्धावस्था सुनिश्चित की जा सकती है। नियमित योगाभ्यास से उम्र बढ़ने के साथ होने वाली कमजोरी, थकान और कई पुरानी बीमारियों से बचाव होता है।


हालांकि, इस आसन को सही तरीके से सीखना आवश्यक है। विशेषज्ञों की देखरेख में अभ्यास करने से चोट लगने का खतरा कम होता है। योग विशेषज्ञ की सलाह के साथ इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें गर्दन, पीठ या उच्च रक्तचाप की समस्या है।