वास्तु शास्त्र के अनुसार पालतू जानवरों की सही देखभाल

पालतू जानवरों का महत्व
आजकल, पालतू जानवर रखना एक सामान्य प्रथा बन गई है। ये केवल जानवर नहीं होते, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह होते हैं। हम उनकी देखभाल बच्चों की तरह करते हैं, उनके भोजन से लेकर रहने की व्यवस्था तक। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र में पालतू जानवरों के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए हैं? यदि इनका पालन किया जाए, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आपके प्यारे साथी भी स्वस्थ और खुश रहते हैं।कुत्तों के लिए उचित स्थान
कुत्ते को इंसान का सबसे वफादार मित्र माना जाता है। वास्तु के अनुसार, यदि आप कुत्ता पालते हैं, तो उनके रहने की जगह उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में बनाना सबसे अच्छा होता है। ये दिशाएँ शांति और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं, जिससे आपका कुत्ता शांत और स्वस्थ रहता है। यह सुनिश्चित करें कि उनका स्थान साफ और हवादार हो।
पक्षियों के लिए सही दिशा
यदि आपके घर में तोते या लव बर्ड्स जैसे पक्षी हैं, तो उनके पिंजरे को पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में खुशहाली आती है और पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है। ध्यान दें कि पक्षियों को ताजा हवा और रोशनी मिलती रहे।
मछलियाँ और कछुए लाते हैं भाग्य
कई लोग घर में मछलियों का एक्वेरियम रखना पसंद करते हैं। वास्तु में मछलियों को सौभाग्य और धन को आकर्षित करने वाला माना गया है। एक्वेरियम को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में रखना सबसे अच्छा होता है। कछुआ भी भाग्य का प्रतीक है। यदि आपने कछुआ पाला है, तो उसे उत्तर दिशा में रखें। ऐसा माना जाता है कि कछुए धन और समृद्धि को अपनी ओर खींचते हैं।
इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर, आप न केवल अपने पालतू दोस्तों को एक अच्छा माहौल दे सकते हैं, बल्कि अपने घर में सुख-शांति और सकारात्मकता को भी बढ़ा सकते हैं। आखिरकार, जब घर का हर सदस्य खुश रहेगा, तभी घर में रौनक होगी।