शादी के कार्ड बनवाते समय वास्तु के महत्वपूर्ण नियम
वरना वैवाहिक जीवन में आएंगी बाधाएं!
शादी के कार्ड का महत्व
विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है, जो जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत करता है। इसीलिए, शादी का निमंत्रण पत्र भी विशेष होता है। यह केवल एक आम निमंत्रण नहीं है, बल्कि यह नए जीवन की शुरुआत का पहला संदेश है। वास्तु शास्त्र, जो एक प्राचीन विज्ञान है, इसमें विवाह पत्रिका के निर्माण के लिए कई नियम बताए गए हैं।
वास्तु के अनुसार कार्ड के रंग
विवाह के निमंत्रण पत्र के लिए लाल, पीला, केसरिया या क्रीम रंग का चयन करना चाहिए। ये रंग शुभ माने जाते हैं। लाल रंग प्रेम और ऊर्जा का प्रतीक है। वहीं, काले या गहरे भूरे रंग का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये नकारात्मकता का संकेत देते हैं। कार्ड पर देवी-देवताओं और मंगल प्रतीकों का होना आवश्यक है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
गणेश जी की तस्वीर का महत्व
विवाह के कार्ड पर गणेश जी की तस्वीर अवश्य होनी चाहिए, क्योंकि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति के आशीर्वाद से होती है। स्वास्तिक और कलश के चिन्ह भी कार्ड पर होना चाहिए। अजीब आकृतियों से बचना चाहिए, और शब्दों की शुद्धता का ध्यान रखना आवश्यक है।
कार्ड पर शब्दों का चयन
कार्ड पर अपशब्द या भारी-भरकम शब्दों का उपयोग नहीं करना चाहिए। युद्ध, सूखे पेड़ या उदास चित्रों से बचना चाहिए। शुभ मुहूर्त और तिथि को स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए। पहला कार्ड हमेशा अपने कुलदेवता या भगवान गणेश को अर्पित करना चाहिए।
