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श्री रुक्मिणी अष्टकम स्त्रोत: विवाह में बाधाओं का समाधान

श्री रुक्मिणी अष्टकम स्त्रोत का पाठ विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। मां रुक्मिणी, जिन्हें मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, की कृपा से जातक के दांपत्य जीवन में मिठास बनी रहती है। इस लेख में हम इस स्त्रोत के महत्व और इसके पाठ के लाभों पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे यह स्त्रोत आपके जीवन में सुख और समृद्धि ला सकता है।
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श्री रुक्मिणी अष्टकम स्त्रोत: विवाह में बाधाओं का समाधान

श्री रुक्मिणी अष्टकम का महत्व

श्री रुक्मिणी अष्टकम स्त्रोत मां रुक्मिणी को समर्पित है। नियमित रूप से इस स्त्रोत का पाठ करने से विवाह में आने वाली समस्याएं समाप्त होती हैं और दांपत्य जीवन में मिठास बनी रहती है।




मां रुक्मिणी को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इस स्त्रोत का पाठ करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे सुख, समृद्धि और धन में वृद्धि होती है। इस लेख में हम श्री रुक्मिणी अष्टकम स्त्रोत के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।


श्री रुक्मिणी अष्टकम

नमस्ते भीष्मकसुते वासुदेवविलासिनि ,


प्रद्युम्नाम्ब नमस्तुभ्यं प्रसीद परमेश्वरि।




नमः कमलमालिन्यै कमले कमलालये,


जगन्मातर्नमस्तुभ्यं कृष्णप्राणाधिकप्रिये।




जानकी त्वं च लक्ष्मीस्त्वं विष्णुवक्षःस्थलस्थिता,


वैकुण्ठपुरसाम्राज्ञी त्वं भक्ताभीष्टदायिनी।




स्वर्णवर्णे रमे रम्ये सौन्दर्याकररूपिणि,


मारमातर्महालक्ष्मि कृष्णकन्दर्पवर्धिनि।




वर्धिनी सुभगानां च वर्षिणी सर्वसम्पदाम् ,


नारायणाङ्घ्रियुग्मे त्वं नित्यदास्यप्रदायिनी।




गोविन्दपट्टमहिषि द्वारकापुरनायिके,


शरण्ये वत्सले सौम्ये भीमातीरनिवासिनि।




त्वदन्या का गतिर्मातरगतीनां जगत्त्रये,


कृष्णकारुण्यरूपा त्वं तत्क्षान्तिपरिवर्धिनी।




कृष्णे त्वयि च हे मातर्दृढा भक्तिः सदाऽस्तु नः,


जयोऽस्तु जय वैदर्भि रुक्मिण्यम्ब जयोऽस्तु ते।