सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: ऐतिहासिक समारोह की 75वीं वर्षगांठ का जश्न
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आगाज
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन गुरुवार से शुरू हो रहा है, जो ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की 75वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। यह समारोह पूरे वर्ष चलने वाले कई आध्यात्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों की शुरुआत करेगा।
नरेन्द्र मोदी का पुराना स्मरण
नरेन्द्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 2001 के एक कार्यक्रम की पुरानी तस्वीरें साझा की हैं, जब मंदिर ने अपनी गोल्डन जुबली मनाई थी। उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री एल.के. आडवाणी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी का योगदान
यह कार्यक्रम गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की देखरेख में आयोजित हुआ था। उन्होंने बताया कि 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ मंदिर में एक ऐतिहासिक सभा हुई थी, जिसमें ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा के स्वर्ण जयंती समारोह का समापन हुआ। यह तारीख सरदार पटेल की जयंती के साथ मेल खाती है, जिन्होंने 1951 में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की योजना बनाई थी।
महत्वपूर्ण व्यक्तियों का स्मरण
इस कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद और कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी जैसे महान व्यक्तियों के योगदान को याद किया, जिनकी मेहनत से सोमनाथ का पुनर्निर्माण संभव हो सका।
सोमनाथ मंदिर का महत्व
एक भावुक भाषण में मोदी ने कहा था कि सोमनाथ मंदिर देश की आत्मा का प्रतीक है और उन्होंने उन 'वीरों' को भी याद किया जिन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों से इस ज्योतिर्लिंग की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुरुआत 1026 में मंदिर पर हुए पहले हमले के 1000 साल पूरे होने की याद में की गई है, जो इसकी स्थायी विरासत और लचीलेपन का जश्न मनाता है।
पीएम मोदी का संदेश
पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देशवासियों को बधाई दी और उस शाश्वत सभ्यता की भावना को याद किया जिसने एक हजार साल से अधिक समय से सोमनाथ मंदिर को जीवित रखा है।
सोमनाथ मंदिर की यात्रा
पीएम मोदी रविवार को सोमनाथ मंदिर जाएंगे, जहां वह स्वाभिमान पर्व समारोह में भाग लेंगे। इस अवसर पर कई आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो 8 से 11 जनवरी तक चलेंगे।
पर्व का मुख्य विषय
इस पर्व का मुख्य विषय "अटूट आस्था" है, जो मंदिर की लचीलेपन, सांस्कृतिक निरंतरता और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में इसकी महत्वपूर्णता को दर्शाता है।
