हरियाणा में जल स्वास्थ्य कार्ड योजना से किसानों को मिलेगा लाभ
हरियाणा में जल स्वास्थ्य कार्ड योजना का शुभारंभ
चंडीगढ़, 11 मई। हरियाणा के किसानों के लिए कृषि अब और अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनने जा रही है। राज्य सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के समान 'जल स्वास्थ्य कार्ड' योजना का खाका तैयार किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अगले तीन वर्षों में राज्य के कुल खाद्यान्न उत्पादन को 5 लाख टन तक बढ़ाना है। कृषि विभाग के अनुसार, इस पहल के तहत हरियाणा के लगभग 8 लाख ट्यूबवेलों के पानी के नमूने लिए जाएंगे।
विशेष वैज्ञानिक टीम करेगी निगरानी
विशेषज्ञों की टीम का गठन
इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। इसमें कृषि विभाग के विशेषज्ञों के साथ हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) हिसार और केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) करनाल के वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह टीम पानी की गुणवत्ता का विश्लेषण कर किसानों को बताएगी कि उनके खेत के पानी के अनुसार कौन सी फसल सबसे अधिक लाभकारी होगी।
मोबाइल पर मिलेगी विस्तृत रिपोर्ट
हाई-टेक जांच प्रक्रिया
पानी की जांच प्रक्रिया को पूरी तरह से तकनीकी रूप से उन्नत किया गया है। ट्यूबवेल से लिए गए हर नमूने को GPS लोकेशन के साथ टैग किया जाएगा ताकि डेटा में कोई त्रुटि न हो। जांच के दौरान पानी की विद्युत चालकता, क्षारीयता, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फेट जैसे 9 महत्वपूर्ण मानकों की जांच की जाएगी। सबसे खास बात यह है कि इसकी विस्तृत रिपोर्ट सीधे किसान के मोबाइल फोन पर भेजी जाएगी।
भूमि की सेहत और लागत में कमी
किसानों को लाभ
वर्तमान में हरियाणा के लगभग 60 प्रतिशत किसान ट्यूबवेल सिंचाई पर निर्भर हैं। लेकिन भू-जल में बढ़ते भारी साल्ट के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है। नई योजना के तहत भू-जल का एक डिजिटल मानचित्र भी तैयार किया जाएगा। इससे किसानों को पहले से पता चल जाएगा कि उनके क्षेत्र का पानी कैसा है। यदि पानी की गुणवत्ता खराब है, तो जिप्सम जैसे सुधारकों का उपयोग कर भूमि की सेहत को बिगड़ने से रोका जा सकेगा।
किसानों को कैसे होगा लाभ?
जल स्वास्थ्य कार्ड के लाभ
जल स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों का पालन करने से खाद और बीज की बर्बादी रुकेगी। जब किसान पानी की प्रकृति के अनुसार फसल उगाएंगे, तो न केवल लागत में कमी आएगी बल्कि पैदावार में भी भारी वृद्धि होगी। कृषि महानिदेशक राज नारायण कौशिक के अनुसार, यह मानचित्र पूरे प्रदेश के कृषि परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है।
