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हरियाणा में डिजिटल खाद वितरण प्रणाली का शुभारंभ

हरियाणा सरकार ने किसानों को खाद और यूरिया की कमी से राहत देने के लिए एक नई डिजिटल खाद वितरण प्रणाली की शुरुआत की है। इस प्रणाली के तहत, किसान अपने स्मार्टफोन के माध्यम से खाद की अग्रिम बुकिंग कर सकेंगे और क्यूआर कोड के माध्यम से खाद प्राप्त करेंगे। बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया से खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। हालांकि, तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए विभाग ने मैन्युअल सत्यापन के विकल्प भी प्रदान किए हैं। इस योजना का उद्देश्य किसानों को खाद प्राप्त करने में अधिक सुविधा प्रदान करना है।
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हरियाणा में डिजिटल खाद वितरण प्रणाली का शुभारंभ

हरियाणा डिजिटल खाद योजना

किसानों को खाद और यूरिया की कमी से राहत देने के लिए सरकार एक महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक परिवर्तन करने जा रही है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने मिलकर 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल' नामक एक नई डिजिटल खाद वितरण प्रणाली विकसित की है। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए हरियाणा के यमुनानगर, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों का चयन किया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, किसानों को खाद की दुकानों पर लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी।


एडवांस बुकिंग और क्यूआर कोड

इस डिजिटल प्रणाली के तहत, किसानों को खाद प्राप्त करने से पहले अपने स्मार्टफोन पर आधिकारिक ऐप के माध्यम से अग्रिम बुकिंग करनी होगी। ऐप पर उन्हें अपनी कृषि भूमि और वर्तमान फसल की जानकारी दर्ज करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने पर, किसान के मोबाइल पर एक क्यूआर कोड आधारित डिजिटल टोकन जारी किया जाएगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि खाद सुरक्षित कर ली गई है।


बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया

जब किसान अपनी चुनी हुई दुकान पर पहुंचेंगे, तो डीलर पीओएस मशीन से उनके मोबाइल में मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। इसके बाद आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इस दोहरे सत्यापन के सफल होने पर खाद का वितरण किया जाएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पारदर्शी प्रक्रिया से यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।


तकनीकी चुनौतियाँ और समाधान

हालांकि, इस नई प्रणाली में कुछ व्यावहारिक चुनौतियाँ भी हो सकती हैं। जैसे कि रबी और खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान जब लाखों किसान एक साथ ऐप का उपयोग करेंगे, तो सर्वर डाउन होने की संभावना है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ किसानों को स्मार्टफोन ऐप का उपयोग करने में कठिनाई हो सकती है। लेकिन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि क्यूआर कोड या बायोमेट्रिक काम नहीं करता है, तो किसान आईडी, आधार नंबर या एप्लिकेशन नंबर के माध्यम से मैन्युअल सत्यापन कर सकते हैं।


प्रशिक्षण कार्यक्रम

योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए पहले चरण में खाद निर्माता कंपनियों और स्थानीय डीलरों को पीओएस मशीनों के संचालन और स्टॉक प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद, गांवों में जागरूकता शिविर आयोजित कर किसानों को ऐप का उपयोग सिखाया जाएगा। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि इस योजना पर जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक होगी। सरकार से अंतिम गाइडलाइन मिलते ही इसे लागू किया जाएगा, जिससे किसानों को खाद प्राप्त करने में सुविधा होगी।