बापू नाडकर्णी: क्रिकेट के महान गेंदबाज और बल्लेबाज
बापू नाडकर्णी का क्रिकेट करियर
नई दिल्ली - क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ियों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है, जो अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी के माध्यम से मैच का रुख बदल सकते हैं। बापू नाडकर्णी एक ऐसे ही खिलाड़ी थे, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी से अद्वितीय योगदान दिया, जब भारतीय क्रिकेट टीम एक युवा टीम मानी जाती थी।
बापू नाडकर्णी का जन्म 4 अप्रैल 1933 को नासिक में हुआ। उनका पूरा नाम रमेशचंद्र गंगाराम 'बापू' नाडकर्णी था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट का शौक था। वह मूल रूप से एक गेंदबाज थे, लेकिन अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने बल्लेबाजी में भी अपनी पहचान बनाई। कहा जाता है कि वह नेट्स में अभ्यास करते समय पिच पर एक सिक्का रखते थे और हर गेंद पर उसे मारने की कोशिश करते थे।
नाडकर्णी ने 16 से 21 दिसंबर 1955 को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच दिल्ली में खेला। उनका अंतिम टेस्ट मैच भी न्यूजीलैंड के खिलाफ 7 से 12 मार्च 1968 को ऑकलैंड में हुआ। अपने 13 साल के करियर में, बाएं हाथ के बल्लेबाज और स्पिन गेंदबाज नाडकर्णी ने भारत के लिए 41 टेस्ट मैच खेले। उन्होंने 67 पारियों में 1 शतक और 7 अर्धशतक के साथ 1,414 रन बनाए और 88 विकेट लिए। 12 जनवरी 1964 को, उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ मद्रास में बिना कोई रन दिए लगातार 21.5 ओवर (131 गेंदें) फेंकने का रिकॉर्ड बनाया।
मुंबई और महाराष्ट्र के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले नाडकर्णी ने 191 प्रथम श्रेणी मैचों में 14 शतक और 46 अर्धशतक के साथ 8,880 रन बनाए और 500 विकेट भी लिए। उनका निधन 17 जनवरी 2020 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ। नाडकर्णी महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर के मेंटर रहे थे।
गावस्कर ने उनके निधन के बाद कहा था कि उनका पसंदीदा शब्द 'छोड़ो मत' था, जिसका अर्थ था कि आप भारत के लिए खेल रहे हैं। हिम्मत रखिए और आगे बढ़िए।
