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IND vs ZIM: क्या चेन्नई में ओस की समस्या का हल निकाल पाएगी भारतीय टीम?

भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी20 वर्ल्ड कप का सुपर 8 का मुकाबला आज चेन्नई में होने जा रहा है। इस मैच में ओस की समस्या को हल करने के लिए 'ड्यू क्योर' नामक रसायन का उपयोग किया गया है। जानें कैसे यह उपाय गेंदबाजों को मदद करेगा और भारतीय टीम की रणनीति क्या है।
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IND vs ZIM: क्या चेन्नई में ओस की समस्या का हल निकाल पाएगी भारतीय टीम?

महत्वपूर्ण मुकाबला: भारत बनाम जिम्बाब्वे


IND vs ZIM: आज शाम भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी20 वर्ल्ड कप का सुपर 8 का एक महत्वपूर्ण मैच होने जा रहा है। यह मुकाबला चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में आयोजित होगा। दोनों टीमों के लिए यह एक निर्णायक मैच है, क्योंकि सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए जीत आवश्यक है। भारतीय टीम इस मैच के लिए पूरी तरह से तैयार है और जीत की उम्मीद कर रही है।


ओस की समस्या से निपटने के लिए विशेष उपाय

टी20 मैचों में शाम के समय ओस (ड्यू) गेंदबाजों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इससे गेंद गीली हो जाती है, जिससे गेंदबाजों को पकड़ बनाने में कठिनाई होती है और बल्लेबाजों को लाभ मिलता है। हालांकि, इस विश्व कप में अब तक ओस का प्रभाव ज्यादा नहीं देखा गया है, लेकिन चेन्नई में बढ़ते तापमान ने इसे लेकर चिंता बढ़ा दी थी। इस समस्या का समाधान करने के लिए तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन (TNCA) ने एक स्मार्ट उपाय निकाला है।


चेपॉक के आउटफील्ड को टूर्नामेंट से पहले नए सिरे से तैयार किया गया था। इस दौरान टीएनसीए ने अमेरिका से 'ड्यू क्योर' नामक एक विशेष रसायन आयात किया है, जिसका उपयोग मेजर लीग बेसबॉल के मैदानों में किया जाता है।


'ड्यू क्योर' का कार्यप्रणाली

मैदान के कर्मचारियों ने इस रसायन को पानी में मिलाकर आउटफील्ड पर छिड़का। यह प्रक्रिया मंगलवार और बुधवार को की गई, और मैच से एक दिन पहले गुरुवार को भी दोबारा छिड़काव किया गया। सूत्रों के अनुसार, 'ड्यू क्योर' छिड़कने के बाद घास की पत्तियों पर नमी नहीं टिकती।


यदि नमी आती भी है, तो वह तुरंत सोख ली जाती है, जिससे घास सूखी रहती है। इससे गेंदबाजों को बेहतर पकड़ मिलती है और मैच में संतुलन बना रहता है। भारतीय टीम ने मंगलवार और बुधवार को चेपॉक में अभ्यास किया और टीम प्रबंधन ओस रहित परिस्थितियों से संतुष्ट नजर आया।


टीम की रणनीति

चेपॉक की पिच इस टूर्नामेंट में बल्लेबाजों के लिए अनुकूल साबित हुई है, जहां पहली पारी का औसत स्कोर लगभग 187 रहा है। आमतौर पर स्पिनरों को मदद मिलती है, लेकिन इस बार तेज गेंदबाजों को भी ज्यादा लाभ नहीं मिल रहा है। ओस पर नियंत्रण होने से गेंदबाजों को मदद मिलेगी, जिससे भारत का स्पिन और पेस अटैक मजबूत होगा।


बीसीसीआई सेमीफाइनल और फाइनल में भी इस तकनीक को अपनाने पर विचार कर रहा है। भविष्य में आईपीएल 2026 के स्टेडियमों में भी 'ड्यू क्योर' का उपयोग किया जा सकता है।