IND vs ZIM: चेन्नई की पिच पर बड़ा स्कोर या गेंदबाज़ों का दबदबा?
IND vs ZIM: पिच रिपोर्ट
IND vs ZIM: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और जिम्बाब्वे के बीच होने वाले मैच से पहले चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम की पिच एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। पारंपरिक रूप से चेपॉक की सतह धीमी और स्पिन गेंदबाज़ों के अनुकूल मानी जाती रही है, लेकिन हाल ही में पिच के रीलैड होने के बाद इसके व्यवहार में बदलाव आया है।
नई सतह पर बाउंस में सुधार हुआ है और बल्लेबाज़ों को शॉट खेलने में पहले से अधिक सहूलियत मिल रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुकाबले में बड़ा स्कोर बनता है या गेंदबाज़ों का दबदबा रहता है।
पारंपरिक चेपॉक बनाम नई पिच का मिजाज

चेपॉक की पहचान हमेशा से स्पिन फ्रेंडली विकेट के रूप में रही है। लाल मिट्टी वाली सतह पर गेंद अच्छी तरह ग्रिप करती है और समय के साथ टर्न बढ़ता जाता है। मैच के दूसरे हिस्से में बल्लेबाज़ों के लिए रन बनाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि पिच धीमी हो जाती है और गेंद बल्ले पर रुककर आती है।
हालांकि हाल के वर्षों में ग्राउंड स्टाफ ने पिच को नए सिरे से तैयार किया है, जिससे सतह पर उछाल बेहतर हुआ है। अब शुरुआती ओवरों में बल्लेबाज़ भरोसे के साथ अपने शॉट खेल पा रहे हैं और गेंद अपेक्षाकृत अच्छी तरह बल्ले पर आ रही है। यही कारण है कि हाल के टी20 मुकाबलों में यहां 170 से 200 के बीच के स्कोर देखने को मिले हैं।
हालिया मैचों में स्कोरिंग ट्रेंड
अंतरराष्ट्रीय टी20 मुकाबलों में चेपॉक ने हाल में बल्लेबाज़ों को निराश नहीं किया है। ग्रुप स्टेज के मैचों में पहली पारी के स्कोर 173 से 200 के बीच रहे, जो इस मैदान की पारंपरिक छवि से थोड़ा अलग तस्वीर पेश करते हैं। बल्लेबाज़ों ने नई पिच पर क्लीन हिट लगाए और बड़े शॉट खेलने में आत्मविश्वास दिखाया।
आईपीएल में भी औसतन पहली पारी का स्कोर 160 से 170 के आसपास रहा है, हालांकि जरूरत पड़ने पर 200 से ऊपर के स्कोर भी बने हैं। इससे साफ है कि पिच पूरी तरह गेंदबाज़ों के कब्जे में नहीं रही, बल्कि संतुलित व्यवहार दिखा रही है।
IND vs ZIM: टॉस और मैच रणनीति की अहमियत
चेपॉक की परिस्थितियों को देखते हुए टॉस अहम भूमिका निभा सकता है। पारंपरिक सोच यही रही है कि यहां पहले बल्लेबाज़ी कर लक्ष्य खड़ा करना फायदेमंद रहता है, क्योंकि दूसरी पारी में पिच और धीमी हो सकती है।
शाम के मैचों में ओस का असर अपेक्षाकृत कम रहता है, जिससे पीछा करना आसान नहीं होता। यदि पहली पारी में टीम 170 से 180 के बीच का स्कोर बना लेती है तो उसे डिफेंड करना संभव है। ऐसे में इस मुकाबले में भी टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाज़ी को प्राथमिकता दे सकती है।
स्पिन और पेस गेंदबाज़ों की भूमिका
चेपॉक की सूखी सतह स्पिनरों के लिए हमेशा मददगार रही है। ऑफ स्पिनर और लेग स्पिनर यहां मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं, खासकर मध्य ओवरों में। गेंद पिच पर रुककर आती है और टर्न मिलने से बल्लेबाज़ों को जोखिम लेना पड़ता है। वहीं तेज़ गेंदबाज़ों को नई गेंद से थोड़ी सीम मूवमेंट मिल सकती है, लेकिन उन्हें स्लोअर गेंद, कटर और विविधताओं का सहारा लेना पड़ता है।
डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर और बदलाव भरी गेंदें ही असरदार साबित होती हैं। कुल मिलाकर, नई पिच ने बल्लेबाज़ों को राहत जरूर दी है, लेकिन स्पिन का प्रभाव अब भी इस मैदान की पहचान बना हुआ है।
