T20 World Cup 2026: एशियाई टीमों का संकट और संभावित इतिहास
नई दिल्ली में एशियाई टीमों की चुनौती
नई दिल्ली: पिछले 50 वर्षों में वनडे और टी20 प्रारूपों में आयोजित 23 पुरुष विश्व कप टूर्नामेंटों में एशियाई टीमों की उपस्थिति हमेशा मजबूत रही है। भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने मिलकर आठ खिताब जीते हैं और सेमीफाइनल में नियमित रूप से स्थान बनाया है।
हालांकि, T20 World Cup 2026 में स्थिति बदलती नजर आ रही है। सुपर 8 के निर्णायक चरण में तीनों प्रमुख टीमें बाहर होने के खतरे में हैं, जिससे एक अनोखी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
एशियाई टीमों का ऐतिहासिक दबदबा
विश्व कप के इतिहास में भारत सबसे सफल एशियाई टीम रही है, जिसने चार विश्व खिताब जीते हैं, जिनमें दो वनडे और दो टी20 शामिल हैं। भारत ने 13 बार सेमीफाइनल में जगह बनाई है। पाकिस्तान और श्रीलंका ने भी 13-13 बार अंतिम चार में प्रवेश किया है। इस निरंतरता ने विश्व कप के नॉकआउट चरण में एशियाई टीमों की उपस्थिति को एक परंपरा बना दिया था।
1975 के बाद पहली बार संकट का सामना
1975 में पहले पुरुष विश्व कप के बाद शायद ही कोई ऐसा टूर्नामेंट हुआ हो जिसमें इन तीनों में से कोई भी सेमीफाइनल में न पहुंचा हो। अब T20 World Cup 2026 में वही संभावना सामने आ रही है। यदि मौजूदा स्थिति बनी रही, तो 51 वर्षों में पहली बार अंतिम चार में भारत, पाकिस्तान या श्रीलंका में से कोई भी नहीं होगा।
भारत की चुनौतीपूर्ण स्थिति
सुपर 8 में भारत ग्रुप 1 में तीसरे स्थान पर है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। वेस्ट इंडीज की जिम्बाब्वे पर 107 रन की जीत ने समीकरण को और जटिल बना दिया है। अब भारत को चेन्नई में जिम्बाब्वे और कोलकाता में वेस्ट इंडीज के खिलाफ बड़े अंतर से जीत हासिल करनी होगी, साथ ही यह भी उम्मीद करनी होगी कि दक्षिण अफ्रीका वेस्ट इंडीज को हरा दे।
पाकिस्तान और श्रीलंका की स्थिति
ग्रुप 2 में इंग्लैंड ने श्रीलंका और पाकिस्तान को हराकर सेमीफाइनल की जगह लगभग पक्की कर ली है। न्यूजीलैंड भी मजबूत स्थिति में है। यदि वह श्रीलंका को हरा देता है, तो पाकिस्तान और श्रीलंका दोनों टूर्नामेंट से बाहर हो जाएंगे, जिससे सेमीफाइनल की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।
2006 जैसी स्थिति का सामना
2006 में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी में तीनों टीमें ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई थीं। अब T20 World Cup 2026 में भी ऐसा ही दृश्य बनने की संभावना है। सुपर 8 के आगामी मुकाबले यह तय करेंगे कि क्या एशियाई युग की निरंतरता टूटेगी या इतिहास फिर से नहीं दोहराया जाएगा।
