प्रधानमंत्री मोदी ने ICC T20 विश्व कप में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की सराहना की
मन की बात में पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 131वें एपिसोड में देश और समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने विशेष रूप से आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 का उल्लेख करते हुए उन खिलाड़ियों की प्रशंसा की, जो भारतीय मूल के होते हुए भी अन्य देशों की राष्ट्रीय टीमों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
टी20 विश्व कप पर पीएम मोदी की राय
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लोगों और संस्कृतियों को जोड़ने का एक सशक्त साधन भी है। उन्होंने बताया कि जब दर्शक टी20 विश्व कप के मैच देखते हैं, तो कई बार किसी खिलाड़ी का नाम सुनकर यह एहसास होता है कि उसका संबंध भारत से है। भले ही वह खिलाड़ी किसी अन्य देश की जर्सी पहनता हो, लेकिन उसके भारतीय मूल से जुड़ाव पर देशवासियों में गर्व और खुशी की भावना उत्पन्न होती है।
कनाडा टीम का उदाहरण
प्रधानमंत्री ने कनाडा की टीम का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस टीम में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संख्या अधिक है। टीम के कप्तान दिलप्रीत बाजवा का जन्म पंजाब के गुरदासपुर में हुआ, जबकि नवनीत धालीवाल और अन्य खिलाड़ी भी भारतीय पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि ये खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से न केवल अपने वर्तमान देश का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि भारत की प्रतिभा और संस्कारों को भी वैश्विक स्तर पर पहचान दिला रहे हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका की टीम में भारतीय खिलाड़ी
इसी प्रकार, अमेरिका की टीम में भी कई खिलाड़ी हैं, जिन्होंने भारत में घरेलू क्रिकेट खेला है। टीम के कप्तान मोनांक पटेल गुजरात की आयु वर्ग की टीमों का हिस्सा रह चुके हैं। इसके अलावा, हरमीत सिंह और मिलिंद कुमार जैसे खिलाड़ी भी भारतीय क्रिकेट प्रणाली से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
ओमान और अन्य देशों में भारतीय खिलाड़ी
प्रधानमंत्री ने ओमान टीम का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां भी कई खिलाड़ी हैं, जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड, यूएई और इटली जैसे देशों में भी भारतीय मूल के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं और वहां के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीयता की विशेषता यही है कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हैं और अपने कर्मस्थल के विकास में योगदान देते हैं। उन्होंने इन खिलाड़ियों को भारत की वैश्विक पहचान का प्रतीक बताते हुए उनकी उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया।
