भारत की हार के बाद T20 विश्व कप प्रोमो पर उठे सवाल
प्रोमो विवाद और भारत की हार
नई दिल्ली: T20 विश्व कप के सुपर 8 चरण से पहले एक प्रोमो ने काफी चर्चा बटोरी। यह विज्ञापन दक्षिण अफ्रीका के पिछले खराब प्रदर्शन पर तंज कसने के लिए बनाया गया था। सोशल मीडिया पर इस पर पहले से ही बहस चल रही थी। लेकिन अहमदाबाद में हुए मैच के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। भारत को 76 रन से हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद इस प्रोमो को हटा दिया गया।
अहंकार बन गया आत्मविश्वास
यह प्रोमो आत्मविश्वास से ज्यादा अहंकार का प्रतीक बन गया था। विज्ञापन में यह संदेश छिपा था कि जीत भारत का अधिकार है, लेकिन मैच ने इस धारणा को तोड़ दिया। दक्षिण अफ्रीका ने हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया। हार के बाद प्रसारकों की चुप्पी ने बहुत कुछ कह दिया। दर्शकों ने भी सवाल उठाया कि खेल को मजाक में क्यों बदला गया।
ofcourse they’ve decided to delete the tweet but @StarSportsIndia deserves this humiliation. if they had an iota of integrity, they would issue an apology to South Africa. unbridled arrogance. the game always finds a way to humble those who think they are bigger than the game 🙏🏽 pic.twitter.com/3QCM3DFw1u
— CaniZ (@caniyaar) February 22, 2026
भारतीय बल्लेबाजों की लापरवाही
हाल के समय में 300 रन बनाने का नैरेटिव जोर-शोर से प्रचारित किया गया। हर चर्चा में बड़े स्कोर की बात होती रही। इसका असर खिलाड़ियों की सोच पर भी पड़ा। अहमदाबाद में बल्लेबाज शुरुआत से ही बड़े शॉट खेलने की कोशिश में विकेट गंवाते रहे। पिच चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन लापरवाही साफ दिखी।
प्रचार का स्तर और दर्शकों की अपेक्षाएं
इतने संसाधनों के बावजूद प्रचार का स्तर हल्का क्यों रहा? विदेशी प्रसारक प्रतिद्वंद्विता को इतिहास और सम्मान के साथ पेश करते हैं। वहां विरोधी टीम का मजाक नहीं उड़ाया जाता। अब दर्शक भी परिपक्व हो चुके हैं। वे खेल की गहराई देखना चाहते हैं, न कि स्कूल स्तर की चुटकुलेबाजी।
भारत और दक्षिण अफ्रीका की भिड़ंत
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुकाबले हमेशा रोमांचक रहे हैं। दोनों टीमों में मैच पलटने की क्षमता होती है। ऐसे मैच को हल्के में लेना खेल के प्रति अन्याय है। खेल में अनिश्चितता होती है, और परिणाम किसी भी दिन बदल सकता है। यही इसकी खूबसूरती है और यही संदेश प्रचार में दिखना चाहिए।
आत्ममंथन की आवश्यकता
अब प्रसारकों के पास अपनी रणनीति बदलने का अवसर है। आत्ममंथन आवश्यक है। शायद अगला विज्ञापन संयम और आत्मविश्लेषण का हो। खिलाड़ियों को भी यह समझना होगा कि विश्व कप में केवल जोश नहीं, धैर्य और योजना भी आवश्यक है। खेल को खेल की तरह पेश करना सबसे सुरक्षित और सम्मानजनक तरीका है।
