Newzfatafatlogo

शिवम दुबे ने टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद ट्रेन से मुंबई यात्रा का अनुभव साझा किया

भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर शिवम दुबे ने हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप 2026 की जीत के बाद अपनी ट्रेन यात्रा का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने फ्लाइट की बजाय ट्रेन से मुंबई जाने का निर्णय लिया। दुबे ने अपने परिवार से मिलने की चाह में यात्रा की और भीड़ से बचने के लिए कई उपाय किए। जानें उनकी इस यात्रा की पूरी कहानी और भावनाएं।
 | 
शिवम दुबे ने टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद ट्रेन से मुंबई यात्रा का अनुभव साझा किया

शिवम दुबे की यात्रा की कहानी


नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर शिवम दुबे ने हाल ही में एक दिलचस्प घटना का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 की जीत के बाद वह फ्लाइट की बजाय ट्रेन से मुंबई क्यों गए। भारत ने 8 मार्च को अहमदाबाद में न्यूजीलैंड को हराकर यह खिताब जीता था, जिसके बाद पूरी टीम जश्न में डूबी हुई थी।


यह पहली बार था जब किसी मेज़बान टीम ने अपने देश में टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता। इससे पहले कई देशों ने इस टूर्नामेंट की मेज़बानी की, लेकिन कोई भी टीम अपने घर में ट्रॉफी नहीं जीत पाई थी। अब यह उपलब्धि भारतीय टीम के नाम हो गई है।


'पिता और बच्चे से मिलने की चाह'

शिवम दुबे ने कहा कि जीत के बाद उनके मन में केवल एक ही ख्याल था कि वह जल्दी से अपने घर पहुंचें। उन्होंने बताया कि वह अपने पिता और बच्चे से मिलने के लिए बेहद उत्सुक थे और इस इंतजार को और नहीं सहन कर पा रहे थे। इसी कारण उन्होंने बिना किसी देरी के घर लौटने का निर्णय लिया।


ट्रेन से यात्रा का निर्णय

उन्होंने पहले फ्लाइट से जाने की कोशिश की, लेकिन उस समय अहमदाबाद से मुंबई की सभी उड़ानें पूरी तरह भरी हुई थीं। ऐसे में उन्होंने दूसरा विकल्प चुना और ट्रेन से यात्रा करने का निर्णय लिया। दुबे के अनुसार, सड़क मार्ग की तुलना में ट्रेन से जाना उन्हें अधिक तेज और सुविधाजनक लगा।


3-टियर एसी कोच में यात्रा

शिवम दुबे अपनी पत्नी और एक दोस्त के साथ 3-टियर एसी कोच में यात्रा करते हुए मुंबई पहुंचे। हालांकि, उनके परिवार और करीबी लोग इस निर्णय को लेकर थोड़े चिंतित थे, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं कोई उन्हें पहचान न ले और भीड़ न जुट जाए।


भीड़ से बचने के उपाय

इससे बचने के लिए दुबे ने पूरी तैयारी की थी। उन्होंने कैप, मास्क और फुल स्लीव कपड़े पहनकर अपनी पहचान छिपाई। इसके अलावा, उन्होंने सुबह 5:10 बजे की ट्रेन चुनी, ताकि स्टेशन पर भीड़ कम हो। वह ट्रेन छूटने से कुछ मिनट पहले तक कार में बैठे रहे और सही समय पर जल्दी से ट्रेन में सवार हो गए। दुबे का यह अनुभव दर्शाता है कि बड़े खिलाड़ी भी अपने परिवार के लिए कितने भावुक होते हैं और कभी-कभी साधारण तरीके से यात्रा करना भी उन्हें विशेष सुकून देता है।