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NEET परीक्षा रद्द होने पर राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल

राहुल गांधी ने NEET परीक्षा रद्द होने के बाद मोदी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने NTA के निदेशक जनरल की भूमिका और छात्रों की मेहनत को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह केवल नाकामी नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है। जानें इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है और कैसे यह छात्रों को प्रभावित कर रहा है।
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NEET परीक्षा रद्द होने पर राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल

NEET परीक्षा रद्द होने पर सियासी हलचल


नई दिल्ली। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित NEET परीक्षा को रद्द कर दिया है, जिसके बाद देशभर में राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। राहुल गांधी इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने पूछा है कि NEET 2024 के दौरान NTA के निदेशक जनरल कौन थे और मोदी सरकार ने उन्हें आज किस पद पर नियुक्त किया है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे खुद गूगल करें और देखें कि उन्हें अब कौन सी जिम्मेदारी दी गई है।


राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मैं देश के युवाओं के सामने एक गंभीर मुद्दा रखना चाहता हूं। कृपया खुद गूगल करें: 'NEET 2024 के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां रखा है?' क्या आपने देखा? क्या समझ में आया?"


उन्होंने आगे कहा, "भाजपा ऐसे लोगों को इनाम देती है जो मेहनती छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। यह स्पष्ट है कि मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में भागीदार हैं। जिस बाजार में आपकी मेहनत और सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही सिद्धांत है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।"


इससे पहले, राहुल गांधी ने लिखा था कि NEET 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई है। 22 लाख से अधिक छात्रों की मेहनत और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपा व्यवस्था ने कुचल दिया है। कई माता-पिता ने कर्ज लिया, कुछ ने गहने बेचे, और लाखों छात्रों ने रात-रात भर पढ़ाई की, लेकिन उन्हें मिला पेपर लीक, सरकारी लापरवाही और शिक्षा में संगठित भ्रष्टाचार। यह केवल नाकामी नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ अपराध है।


हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सजा भुगतते हैं। अब लाखों छात्रों को फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा। अगर मेहनत से नहीं, बल्कि पैसे और पहुंच से किस्मत तय होगी, तो फिर शिक्षा का क्या मतलब रह जाएगा? प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल देश के लिए विषकाल बन गया है।