पीएम मोदी की चीन यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद

पीएम मोदी की चीन यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी वर्तमान में दो दिवसीय यात्रा पर चीन में हैं, जो कि उनके लिए सात वर्षों बाद की पहली यात्रा है। इस यात्रा के दौरान, तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। पीएम मोदी इस अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दो बार मुलाकात करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की संभावनाएं जताई जा रही हैं। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और व्यापार संबंधी मुद्दे अक्सर चर्चा का विषय बने रहते हैं। इन मुद्दों पर सकारात्मक परिणाम की उम्मीद की जा रही है। हाल ही में, चीन के राजदूत ने भारत में निवेश के लिए आमंत्रण दिया था।
सीमा विवाद का क्या है कारण?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का मुख्य कारण चीन की विस्तारवादी नीति है। गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट भारत द्वारा पुल निर्माण की योजना पर चीन ने आपत्ति जताई थी, जिसके परिणामस्वरूप घुसपैठ की कोशिश की गई थी। इस मुठभेड़ में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे, जबकि चीन को भी नुकसान उठाना पड़ा था। इसके अलावा, डोकलाम विवाद, अक्साई चिन, जॉनसन लाइन, मैकार्टनी-मैकडोनाल्ड लाइन और ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट जैसे कई अन्य सीमा विवाद भी हैं।
व्यापार पर प्रभाव
भारत सरकार ने चीन के कई लोकप्रिय ऐप्स, जैसे कि टिक टॉक, पर प्रतिबंध लगाया था। इसके साथ ही, केंद्र सरकार 'मेड इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे अभियानों के माध्यम से घरेलू उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। इस कारण से, चीन के साथ व्यापार काफी समय से ठंडा पड़ा हुआ है। पीएम मोदी की चीन यात्रा से उम्मीद की जा रही है कि प्रतिबंधित ऐप्स फिर से सक्रिय होंगे और व्यापार में तेजी आएगी।
अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ रणनीति
हालांकि अमेरिका ने चीन पर कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया है, फिर भी चीन ने भारत पर अमेरिकी टैरिफ का विरोध किया है। 21 अगस्त को, चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने भारत का दौरा किया और अमेरिका के 50% टैरिफ का कड़ा विरोध किया। ऐसे में, पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ एक रणनीति तैयार करने की संभावना है, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और अमेरिका में निर्यात पर निर्भरता कम करने पर विचार किया जा सकता है।