बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने का उत्सव 2026
बद्रीनाथ धाम का उद्घाटन
बद्रीनाथ धाम 2026: हिमालय की गोद में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट आज 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। वैदिक मंत्रों और सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच भगवान 'बदरी विशाल' के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। क्या आप जानते हैं कि बद्रीनाथ में शंख बजाना क्यों निषिद्ध है?
ज्ञान और मोक्ष का स्थान
ज्ञान और मोक्ष का द्वार: बद्रिकाश्रम (बद्रीनाथ) हिमालय में एक अत्यंत पवित्र तपस्थली है। इसे भगवान विष्णु का प्रमुख धाम माना जाता है (चार धाम में से एक)। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहाँ ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी, और इसे ज्ञान और मोक्ष का द्वार माना गया है। स्कंद पुराण के केदारखंड में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
सरस्वती नदी का महत्व
सरस्वती नदी ज्ञान और चेतना का प्रतीक: सरस्वती नदी को 'गुप्त (अदृश्य) नदी' कहा जाता है। मान्यता है कि यह नदी बद्रिकाश्रम के पास प्रकट होती है और आगे जाकर लुप्त हो जाती है। यह नदी केवल भौतिक नहीं, बल्कि ज्ञान और चेतना का प्रतीक है। ऋग्वेद में इसे 'नदियों की माता' कहा गया है। बद्रीनाथ के पास 'भीम पुल' के निकट आज भी सरस्वती का तेज प्रवाह देखा जा सकता है।
वाग्देवी का महत्व
वाग्देवी (माँ सरस्वती): वाग्देवी का अर्थ है 'वाणी की देवी', यानी ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी। इन्हें सरस्वती देवी के नाम से भी जाना जाता है। यह संगीत, शिक्षा और विद्या की अधिष्ठात्री हैं। इन्हें वीणा, पुस्तक और हंस के साथ दर्शाया जाता है।
