500 रुपये के नोट पर अफवाहों का सच: सरकार ने किया स्पष्ट
सोशल मीडिया पर फैली अफवाह
नई दिल्ली: एक बार फिर से भारतीय मुद्रा को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें उड़ी हैं। यह दावा किया गया है कि केंद्र सरकार काले धन पर नियंत्रण लगाने के लिए 500 रुपये के नोटों को बंद करने जा रही है। इस पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तस्वीरें शामिल की गई हैं, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई यूजर्स ने इस पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी ने इस दावे की सच्चाई को उजागर किया है.
ग्राफिक पोस्ट से शुरू हुई अफवाह
यह अफवाह एक ग्राफिक पोस्ट से शुरू हुई, जिसमें कहा गया था कि सरकार 500 रुपये के नोटों को बंद करने की योजना बना रही है। इस पोस्ट को प्रिया पुरोहित नाम की एक यूजर ने साझा किया था, जिसमें उन्होंने कुछ ऐसा लिखा था कि लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई। यह पोस्ट तेजी से विभिन्न प्लेटफार्मों पर फैल गई और कई लोगों ने बिना जांचे इसे सच मान लिया।
पीआईबी का फैक्ट चेक
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने इस वायरल दावे को गलत बताया है। पीआईबी ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से 500 रुपये के नोटों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। एक्स पर साझा किए गए फैक्ट चेक पोस्ट में वायरल ग्राफिक पर फेक की मुहर लगाई गई है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह दावा पूरी तरह से भ्रामक है।
सरकार की मुद्रा नीति
सरकार ने पहले भी कई बार स्पष्ट किया है कि मुद्रा से संबंधित निर्णय केवल आरबीआई और वित्त मंत्रालय के माध्यम से लिए जाते हैं। इस तरह की नीतियों की घोषणा सोशल मीडिया या अनौपचारिक ग्राफिक्स के माध्यम से नहीं की जाती है। पीआईबी ने लोगों को सलाह दी है कि वे वित्तीय मामलों में केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
अफवाहों का प्रभाव
इस प्रकार की झूठी खबरें आम जनता में डर और भ्रम पैदा करती हैं। यदि ऐसी अफवाहें तेजी से फैलती हैं, तो यह बैंकिंग प्रणाली पर अनावश्यक दबाव डाल सकती हैं। 2016 में नोटबंदी के दौरान भी अफवाहों के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। विशेषज्ञों का मानना है कि गलत सूचनाएं आर्थिक स्थिरता के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
जनता की जिम्मेदारी
फर्जी खबरों के खिलाफ लड़ाई में पीआईबी जैसी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन जनता की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना आवश्यक है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को भी भ्रामक सामग्री पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की अफवाहें फैलने से रोकी जा सकें।
