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इंग्रिड होंकाला: तीन बार मौत का सामना करने वाली NASA की पूर्व वैज्ञानिक

इंग्रिड होंकाला, NASA की पूर्व वैज्ञानिक, ने तीन बार मृत्यु का सामना किया और अद्भुत अनुभव साझा किए हैं। उनके अनुसार, मृत्यु कोई अंत नहीं है, बल्कि चेतना का एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन है। जानें उनके अनुभव और कैसे उन्होंने विज्ञान और आध्यात्मिकता को जोड़ा है।
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इंग्रिड होंकाला: तीन बार मौत का सामना करने वाली NASA की पूर्व वैज्ञानिक

इंग्रिड होंकाला का अद्भुत अनुभव


नई दिल्ली: NASA की पूर्व वैज्ञानिक इंग्रिड होंकाला ने दावा किया है कि उन्होंने तीन बार 'मरने' का अनुभव किया है, और हर बार उन्होंने मृत्यु के बाद की रहस्यमय दुनिया का सामना किया। इंग्रिड, जो कोलंबिया के बोगोटा की निवासी हैं, बताती हैं कि उनका पहला अनुभव तब हुआ जब वह केवल दो साल की थीं।


वह अपने घर के पास एक ठंडे पानी के टैंक में गिर गई थीं, जिससे उन्हें सांस लेने में कठिनाई होने लगी। इंग्रिड ने बताया कि उस ठंडे पानी में संघर्ष करते हुए अचानक उन्हें गहरी शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने शरीर से बाहर आ गई हूं।'


इंटरव्यू में इंग्रिड का अनुभव

इंटरव्यू में इंग्रिड ने क्या बताया?


एक साक्षात्कार में, इंग्रिड ने साझा किया कि जब वह अपने शरीर से बाहर थीं, तो उन्होंने देखा कि उनकी मां घर से बाहर जा रही हैं। उन्होंने अपनी मां से 'टेलीपैथी' के माध्यम से संपर्क किया। जैसे ही उनकी मां को यह एहसास हुआ कि कुछ गलत हो रहा है, वह तुरंत घर वापस लौटीं और इंग्रिड को पानी से बाहर निकाला, जिससे उनकी जान बच गई।


मौत के बाद की दुनिया का अनुभव

मौत के बाद उन्होंने क्या देखा?


अब 55 वर्ष की इंग्रिड का कहना है कि मृत्यु से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, उस 'दूसरी दुनिया' में समय का कोई अस्तित्व नहीं था। उन्होंने खुद को एक बच्ची के रूप में नहीं, बल्कि 'रोशनी की एक किरण' के रूप में अनुभव किया। उन्हें यह समझ में आया कि पूरे ब्रह्मांड की हर चीज आपस में जुड़ी हुई है। उन्होंने कुछ 'दिव्य शक्तियों' से भी संवाद किया।


मौत का सामना करने के अन्य अनुभव

और कब-कब हुआ मौत से सामना?


इंग्रिड की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। 25 वर्ष की आयु में एक गंभीर मोटरसाइकिल दुर्घटना के बाद और फिर 52 वर्ष की उम्र में एक सर्जरी के दौरान जब उनका रक्तचाप अचानक गिर गया, तब भी उन्होंने मृत्यु का सामना किया। वह कहती हैं, 'हर बार, मैं उसी गहरी शांति में लौट जाती थी।' सच कहूं तो, अब मुझे मृत्यु का कोई डर नहीं है।


लोगों की प्रतिक्रियाएं

लोगों का क्या है मानना?


कुछ लोग इन अनुभवों को ऑक्सीजन की कमी से उत्पन्न भ्रम मानते हैं, जबकि इंग्रिड ने अपने वैज्ञानिक करियर को इन गहरे अनुभवों से जोड़ा है। इंग्रिड, जिनके पास मरीन साइंस में PhD है और जिन्होंने NASA और U.S. Navy के साथ काम किया है, का मानना है कि विज्ञान और आध्यात्मिकता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।


अपनी आगामी पुस्तक 'Dying to See the Light' में वह लिखती हैं, 'हमारी चेतना केवल दिमाग से उत्पन्न नहीं होती, बल्कि यह ब्रह्मांड का एक मूलभूत हिस्सा है। मृत्यु कोई अंत नहीं है, बल्कि यह चेतना का एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन है।'