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चीन के बाओआन समुदाय की अनोखी शादी की परंपराएं

चीन के बाओआन समुदाय की विवाह परंपराएं अद्वितीय और रोचक हैं। इस समुदाय में 'ससुर को कोड़े मारना' जैसी रस्में होती हैं, जो पारिवारिक विनम्रता और सामाजिक मर्यादा को दर्शाती हैं। जानें इस अनोखी परंपरा के बारे में और कैसे यह तीन दिनों तक चलने वाले समारोह का हिस्सा होती है।
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चीन के बाओआन समुदाय की अनोखी शादी की परंपराएं

बाओआन समुदाय की विवाह परंपरा


नई दिल्ली: चीन एक ऐसा देश है जहाँ आधुनिकता के साथ-साथ प्राचीन परंपराएं भी जीवित हैं। यहाँ विभिन्न जातीय समूह निवास करते हैं, जिनकी सांस्कृतिक विशेषताएँ और रीति-रिवाज पूरी दुनिया से भिन्न हैं। इनमें से एक बाओआन जातीय समूह है, जिसकी विवाह से जुड़ी परंपरा सुनकर लोग चकित रह जाते हैं।


रिपोर्टों के अनुसार, बाओआन समुदाय में विवाह के दौरान एक अनोखी रस्म होती है, जिसे 'ससुर को कोड़े मारना' कहा जाता है। इस रस्म में दूल्हे का पिता प्रतीकात्मक रूप से दुल्हन के पिता को 20 बार कोड़े मारता है। यह प्रक्रिया शादी के तीन दिनों तक चलने वाले समारोह का हिस्सा होती है। यह रस्म किसी दंड के रूप में नहीं, बल्कि पारिवारिक विनम्रता और सामाजिक मर्यादा को दर्शाने के लिए होती है। इसमें किसी को वास्तविक चोट नहीं पहुँचाई जाती।


बाओआन समुदाय का निवास स्थान

बाओआन जातीय समूह मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी चीन के गांसू प्रांत में बसा हुआ है। इस समुदाय की जनसंख्या लगभग चौबीस हजार के आसपास है। ये लोग इस्लाम का पालन करते हैं और बाओआन भाषा बोलते हैं, जो अल्ताई भाषा परिवार से संबंधित मानी जाती है।


बाओआन समुदाय में विवाह की प्रक्रिया काफी व्यवस्थित होती है। जब दूल्हे का परिवार विवाह का प्रस्ताव रखता है, तो वे 'सोंगडिंगचा' नामक उपहार देते हैं, जिसका अर्थ चाय होता है। इस उपहार में मिश्री, सूखे लौंग, चाय की पत्तियाँ और अखरोट शामिल होते हैं, जिन्हें विभिन्न रंग के कागज में लपेटा जाता है। यदि लड़की का परिवार इस उपहार को स्वीकार करता है, तो इसका मतलब है कि दोनों परिवारों के बीच विवाह के लिए सहमति बन गई है।


तीन दिन तक चलने वाला विवाह समारोह

बाओआन समुदाय की शादी तीन दिनों तक चलती है, जिसमें हर दिन अलग-अलग रस्में होती हैं। इनमें सबसे विशेष रस्म होती है, जिसमें दुल्हन के पिता को घुटनों के बल बैठाकर प्रतीकात्मक सजा दी जाती है। इस दौरान दुल्हन के पिता सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हैं कि वे अपनी बेटी को सही अनुशासन नहीं सिखा पाए। हालाँकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि बेटी गलत आचरण वाली है, बल्कि यह केवल विनम्रता दिखाने का एक तरीका है।


शादी के दिन, दुल्हन की बहनें और परिवार की अन्य महिलाएँ दूल्हे के साथ उसके घर जाती हैं। वहाँ वे मजाकिया अंदाज में खाना पकाने के बर्तन से निकाली गई कालिख दूल्हे के पिता के चेहरे पर लगाती हैं, जो शुभ संकेत और स्वागत का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद दूल्हे के पिता को दुल्हन के घर आमंत्रित किया जाता है, जहाँ मुख्य रस्म निभाई जाती है।


कोड़े मारने की रस्म का महत्व

जब दुल्हन के पिता घुटने टेकते हैं, तो दूल्हे के पिता पहले से रखी चाबुक उठाते हैं और बीस बार मारने का नाटक करते हैं। यह पूरी तरह से प्रतीकात्मक होता है। इसके बाद यह रस्म समाप्त मानी जाती है और शादी का भोज शुरू होता है।


शादी के बाद, दुल्हन पहले तीन दिनों तक दूल्हे के घर का खाना नहीं खाती। वह केवल अपने मायके से लाए गए भोजन का सेवन करती है। यह परंपरा माता-पिता के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का प्रतीक मानी जाती है।