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दक्षिण कोरिया में ह्यूमनॉइड रोबोट को मिली बौद्ध भिक्षु की दीक्षा

दक्षिण कोरिया में एक ह्यूमनॉइड रोबोट, जिसका नाम गाबी है, को बौद्ध भिक्षु के रूप में दीक्षा दी गई। यह घटना न केवल तकनीक की प्रगति को दर्शाती है, बल्कि धार्मिक परंपराओं में भी एक नया मोड़ लाती है। रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध वस्त्र पहने और समारोह में उपस्थित लोगों के सवालों के जवाब दिए। इस प्रयोग का उद्देश्य बौद्ध भिक्षुओं की कमी को पूरा करना है, जो कई एशियाई देशों में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है।
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दक्षिण कोरिया में ह्यूमनॉइड रोबोट को मिली बौद्ध भिक्षु की दीक्षा

नई तकनीक का अनोखा प्रयोग


नई दिल्ली: आज के युग में रोबोट और तकनीक लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। हाल ही में दक्षिण कोरिया में एक ऐसी घटना घटी है जिसने सभी को चौंका दिया है। यहां एक ह्यूमनॉइड रोबोट को बौद्ध भिक्षु के रूप में दीक्षा दी गई है।


गाबी का दीक्षा समारोह

सियोल के प्रसिद्ध जोग्ये मंदिर में आयोजित एक विशेष समारोह में इस रोबोट को आधिकारिक रूप से बौद्ध दीक्षा दी गई। इस रोबोट का नाम 'गाबी' रखा गया है, जिसकी ऊंचाई लगभग 130 सेंटीमीटर है।




रोबोट की प्रतिक्रिया

यह केवल तकनीक का एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह एक धार्मिक समारोह था, जो इंसानों के लिए आयोजित किए जाने वाले समारोहों के समान था। रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध वस्त्र पहने, हाथ जोड़कर प्रार्थना की और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को स्वीकार किया। समारोह में उपस्थित लोगों के सामने उसने वही सवालों के जवाब दिए जो आमतौर पर नए भिक्षुओं से पूछे जाते हैं।


दीक्षा से पहले, रोबोट ने प्रशिक्षण लिया, जैसे कि एक 'नौसिखिए' के रूप में। इस प्रक्रिया के बाद, उसे बौद्ध समुदाय का सदस्य माना गया।


भिक्षुओं की कमी का समाधान

वास्तव में, कई एशियाई देशों में बौद्ध भिक्षुओं की संख्या में कमी आ रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए रोबोट को एक संभावित सहायक के रूप में देखा जा रहा है। यह रोबोट मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को जानकारी देने और धार्मिक रीति-रिवाजों के बारे में सिखाने में सक्षम है।


युवा पीढ़ी धार्मिक जीवन में कम रुचि दिखा रही है, जबकि बुजुर्ग भिक्षुओं की संख्या बढ़ रही है, जिससे मंदिरों का प्रबंधन कठिन हो रहा है।


अन्य देशों में प्रयोग

जापान और दक्षिण कोरिया में पहले भी इसी तरह के प्रयोग किए जा चुके हैं। AI-संचालित रोबोटों को बौद्ध धर्मग्रंथों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान कर सकें। यह रोबोट ऐसी तकनीक से लैस है जो इसे इंसानों की तरह बातचीत करने और धार्मिक संदर्भ में उत्तर देने में सक्षम बनाती है।


जापान में भी ऐसे रोबोट विकसित किए गए हैं, जो धार्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। वहां कई मंदिर बंद होने की कगार पर हैं, इसलिए इस तकनीक की आवश्यकता महसूस की गई।